Mithilesh Rai

  • मुझको याद है तेरा शर्माते हुए मिलना!
    धीरे-धीरे जुल्फ को बिखराते हुए चलना!
    चाँदनी सी रोशनी ले आती है आरजू,
    जैसे हो तन्हाइयों में फूलों का खिलना!

    मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

  • Mithilesh Rai changed their profile picture 3 weeks, 6 days ago

  • जब कभी लबों से कोई बात नहीं होती!
    शबनमी पलों की कोई रात नहीं होती!
    डोलते ही रहते हैं हर कदम यादों के,
    जब कभी भी तुमसे मुलाकात नहीं होती!

    मुक्तककार -#मिथिलेश_राय

  • तेरे हुस्न का मुझपर पहरा सा रहता है!
    तेरा ख्वाब पलकों में ठहरा सा रहता है!
    तड़पाती रहती हैं मुझको यादें हर घड़ी,
    तेरा रंग अश्कों में गहरा सा रहता है!

    मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

  • क्यों तेरी तमन्नाओं से मैं छिपता रहता हूँ?
    क्यों अपनी बेबसी को मैं लिखता रहता हूँ?
    नाजुक से हैं ख्याल मगर चुभते हैं जब कभी,
    जाम की गलियों में अक्सर दिखता रहता हूँ!

    मुक्तककार -#मिथिलेश_राय

  • आज फिर मौसम में नमी सी आ रही है!
    जिन्दगी में तेरी कमी सी आ रही है!
    आ गया है रूबरू कारवाँ ख्यालों का,
    यादों की लहर शबनमी सी आ रही है!

    मुक्तककार – #मिथिलेश_राय’

  • धन्यवाद आदरणीया

  • धन्यवाद

  • मुझसे खता हुई है तुमसे दिल लगाने की!
    तुम भी भूल गये हो राहें पास आने की!
    फैली हुई दरारें हैं चाहत के दरमियाँ,
    कोशिशें नाकाम हैं जख्मों को भुलाने की!

    मुक्तककार -#मिथिलेश_राय

  • जी रहा हूँ मैं तो अश्कों को पीते-पीते!
    जी रहा हूँ मैं तो जख्मों को सीते-सीते!
    खोया हुआ सा रहता हूँ चाहत में तेरी,
    मर रहा हूँ मैं तो यादों में जीते-जीते!

    मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

  • राहे-वक्त में तुम बदलते जा रहे हो!
    तन्हा रास्तों पर तुम चलते जा रहे हो!
    दूर-दूर क्यों रहते हो जिन्दगी से तुम?
    बेखुदी की शक्ल में ढलते जा रहे हो!

    मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

  • तेरी याद आज भी मुझको रुलाती है!
    तेरी याद आज भी मुझको सताती है!
    भूलना मुमकिन नहीं है तेरे प्यार को,
    तेरी याद आज भी मुझको बुलाती है!

    मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

  • हर शक्स जमाने में गुमनाम जैसा है!
    दर्द और तन्हाई की शाम जैसा है!
    जलता हुआ सफर है राहे-मंजिलों का,
    जिन्दगी को ढूँढता पैगाम जैसा है!

    मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

  • तेरी याद न आए तो फिर रात क्या हुई?
    तेरा दर्द न आए तो फिर बात क्या हुई?
    पलकों में अभी अश्क भी आए नहीं अगर,
    तेरे ख्यालों से फिर मुलाकात क्या हुई?

    मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

  • टूटते ख्वाबों के फसाने हैं बहुत!
    जिन्दगी में गम के बहाने हैं बहुत!
    बस तू ही खफा नहीं है अंजाम से,
    शमा-ए-चाहत के परवाने हैं बहुत!

    मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

  • टूटते ख्वाबों के फसाने हैं बहुत!
    जिन्दगी में गम के बहाने हैं बहुत!
    बस तू ही खफा नहीं है अंजाम से,
    शमा-ए-चाहत के परवाने हैं बहुत!

    मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

  • धन्यवाद आदरणीय

  • फसाना जिंदगी का अजीब सा होता है!
    हर ख्वाब आदमी का रकीब सा होता है!
    बदली हुई निगाह से डर जाते हैं कदम,
    मंजिलों का मिलना तरकीब सा होता है!

    मुक्तककार -#मिथिलेश_राय

  • तेरे सिवा कुछ भी नजर आता नहीं है!
    ख्वाबों का सफर भी मुस्कुराता नहीं है!
    राह खींच लेती है यादों की इसतरह,
    तेरा ख्याल मुझसे दूर जाता नहीं है!

    मुक्तककार -#मिथिलेश_राय

  • दर्द के दामन में चाहत के कमल खिलते हैं!
    अश्क की लकीर पर यादों के कदम चलते हैं!
    रेंगते ख्यालों में नजर आती हैं मंजिलें,
    जब भी निगाहों में ख्वाबों के दिये जलते हैं!

    मुक्तककार -#मिथिलेश_राय

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