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  • Manisha Nema posted an update 11 months, 1 week ago

    ..मेरे पापा..

    अम्बर नीला है,
    मेरे कदमों के नीचे का फर्श गीला है;
    पर मुझे क्या गिला है,
    मुझे तो मेरे पापा का साथ मिला है !!!!
    ……..सर के ऊपर छत रखी,
    ……..और छत पर आसमान;
    ……..बाहें फैला कर उड़ जाऊं मैं ‘पापा’,
    ……..आपने ही मेरे अरमानों में पंखों को सिला है !!!!
    मंडराते थे सपनों के जुगनू मेरे आस-पास,
    आपने ही उजालों से अंधेरों को भरा है;
    आप ही बादल बने कई बार जब,
    तब जाड़ों का कोई फूल गरमी में खिला है !!!!
    ……..फिसलन से भरी जमीन पर आज,
    ……..सधे सधे से हैं कदम;
    ……..आपसे से ही सीखा है,
    ……..आपकी हर सीख आज साथ है हरदम !!!!
    अंधेरी सी उन रातों में,
    डर से सहमे सहमे थे हम;
    बंद आँखें जब खुली तो,
    आपकी बाहों में थे हम !!!!
    ……..भिगोने आई थी कभी,
    ……..कहर की बूँदें हमें,
    ……..सुरक्षा का कवच देकर हमें,
    ……..आप ही गीले हुए हैं !!!!
    बाहर से रुक्ष से दिखने वाले मेरे पापा,
    हम जानते हैं..
    किस कदर, दिल पर पत्थर रख कर ही,
    आप हमारे साथ सख्त हुए हैं !!!!
    ……..जो आपके मार्गदर्शन का उजाला न होता तो,
    ……..हमें पता ही नहीं चलता के,
    ……..हमारे विकास के पैरों में छाले हुए हैं !!!!
    आपके रौशन विचारों से ही,
    हमारे जीवन में सबेरे हुए हैं,
    जमाने की भीड़ और भावनाओं की बाढ़ हमें बहा ले जाती,
    हर बार हमें बचाने वाले..’पापा’, आप ही हमारे सहारे हुए हैं !!!!
    .. मनीषा नेमा ..