ज्योति कुमार

  • तेरे बग़ैर तेरी तस्वीरों का क्या करूँ?
    मैं तेरे ख़्यालों की जंज़ीरों का क्या करूँ?
    अश्क़ों को छुपा लेता हूँ पलकों में लेकिन-
    मैं तेरे सपनों की ज़ाग़ीरों का क्या करूँ?

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • Mithilesh Rai posted an update 2 weeks ago

    तेरे बग़ैर तेरी तस्वीरों का क्या करूँ?
    मैं तेरे ख़्यालों की जंज़ीरों का क्या करूँ?
    अश्क़ों को छुपा लेता हूँ पलकों में लेकिन-
    मैं तेरे सपनों की ज़ाग़ीरों का क्या करूँ?

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • चेहरे हर एक रोज बदलने का शौख रखते हैं,
    कुछ लोग अपने आप को बड़ा बेख़ौफ़ रखते हैं।।

    राही अंजाना

  • छोटी सी उमर में बदल कर देखो चाल बैठ गया,
    पहनके इंसा ही जानवर की देखो खाल बैठ गया,

    बड़ी बहुत हो गई ख्वाइशों की बोतल उस दिन से,
    रिश्तों का कद भूल जब कोई देखो नाल बैठ गया,

    मनाया मगर माना […]

  • ज्ञान की पोथियाँ सारी चन्द पैसों में तोल लेता हूँ मैं,
    जो भी जब भी मुँह में आ जाये यूँही बोल देता हूँ मैं,

    समझ पाता नहीं हूँ किताबों में लिखे काले अक्षर मैं,
    सो तराज़ू के बाट बराबर ही सबका मोल लेता हूँ मैं […]

  • मन की बातो को कलम के सहारे से इशारा देता हूँ
    मैं अंजाना होकर भी कुछ लहरों को किनारा देता हूँ,

    जब जुबां और दिल सब हार कर अकेले में बैठते हैं,
    तब मैं दर्द से भरी चुनिंदा तस्वीरों का सहारा लेत […]

  • कुछ बेदर्द इंसानों ने अपनी अक्ल उतार कर रख दी,
    मासूम ज़िन्दगी की आईने में शक्ल उतार कर रख दी,

    दिन में लगे जो गहरे घावों की वस्ल उतार कर रख दी,
    पुनर्जन्म के पन्नों की खुदरी नक़्ल उतार कर रख दी।।

    राही अंजाना […]

  • शिकार करने चली थी बाज का,
    हुस्न के गुरूर मे ।।

    हँसी थामे ‘सच’ कहू …
    पर भी ना मिला कबुतर का ।।
    ~ सचिन सनसनवाल

  • तोड़ सके तो कोशिश कर ले एक और बार,
    अब कसम से दिल को पत्थर कर लिया मैंने।।

    राही अंजाना

  • अँधेरे की वाट लगाने को जुगनुओं को आना पड़ा,
    समन्दर में नहाने को खुद उतर चाँद को आना पड़ा,

    आवाज़ लगाई दिल ओ ज़ान से मगर सुनी नहीं गई,
    तो गमों के बिस्तरों को फिर आसुओं से भिगाना पड़ा।।
    राही अंजाना

  • मरम्मत उसूलों की करनी अभी बाकी रह गई,
    कहीं सच के मुँह पर लगी झूठी चाबी रही गई,

    बना तो लिए बर्तन सोने चाँदी के भी कारीगर ने,
    के अमीरी में गरीबी की थाली यूँही खाली रह गई,

    आईने में देखनी सूरत खुद ही की सा […]

  • छोड़ कर पीछे सबको आज चाँद को घुमाने निकला हूँ,
    सच कहता हूँ दोस्त मेरे आज खुद को गुमाने निकला हूँ,

    सोया था न जाने कब से समन्दर की बाँहों में यूँ अकेला,
    पिघले हुए एहसास को आज फिर जमाने को निकला हूँ,

    राही अंजाना

  • ashmita and Profile picture of Ekta VyasEkta Vyas are now friends 3 weeks, 3 days ago

  • मैं बहोत खूब जानता हूँ उसे,
    खुद से जादा ही मानता हूँ उसे

    वो कहीं भी ढूढ़ता नहीं मुझको,
    मैं ख्वाबो में भी छानता हूँ उसे।।
    राही अंजाना

  • अब तो हमसे कोई और सफर नहीं होता,
    क्यों भला उनसे अब भी सबर नहीं होता,

    सब पर होता है बराबर से के जानता हूँ मैं,
    एक बस उन्हीं पे मेरा कोई असर नहीं होता,

    याद रह जाता गर प्यार में कोई सिफ़त होता,
    खत्म हो […]

  • अपने आप से ही एक जंग जारी रक्खा करो,
    खेल कोई भी हो पर अपनी बारी रक्खा करो।।

    दुश्मन हर कदम पर बैठे हैं नज़रें गढ़ाए यहाँ,
    होसके तो दुश्मनी में भी कहीं यारी रक्खा करो।।

    फैलाकर हाथों को यूँ ज़रूरी नहीं हो मुराद […]

  • दिल ने धड़कन की ही मान लो के अब सुनना छोड़ दी,
    स्त्री को नचाया जबसे इंसा ने कठपुतली बुनना छोड़ दी,

    देखती ही रहीं आँखों की दोनों पुतलियाँ एक दूजे को,
    उँगलियों के इशारों पर हाथों ने सुतली चुनना छोड़ दी।।

    राही अंजाना

  • ashmita and Profile picture of Rahasya deoriaRahasya deoria are now friends 1 month ago

  • कुछ कहे बिना ही बहुत कुछ कह गया,
    ख़ामोश बादल यूँही बरस कर रह गया,

    बनाया आशियाना बड़ी उम्मीदों से हमनें,
    ज़रा सी हुई हरकत तो परस कर रह गया,

    कैद ऐ मोहब्बत की गिरफ्त से छूट कर,
    राही अंजाना सबसे सरस कर रह गया […]

  • आज मेरी खुद से मुलाकात हो गई
    चुप थी जमाने से, आज खुद से बात हो गई।

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