ज्योति कुमार

  • जिन्दगी तेरी नराजगी से क्या होगा ।
    ये मुस्कुराहट जिन्दगी का karzadar है।

  • हमे तो मालुम था,
    पतझड़ मे पत्ते भी साथ छोड़ देते है,देखकर मेरी तबाही को अपनो भी साथ छोड़ देते है!!
    बस तु तो चलती हुई मुशाफीर थी-
    ये मतलबी दुनिया बाप को भी छोड़ दे […]

  • वस्ती की पुकार
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    डरावना–डरावना सी भय लगी इस वस्ती मे।
    चार–पाँच लफँगा हर मोड़ पर खड़ा इस वस्ती मे।
    कितना राज छुपाए डरा–डरा सा हूँ खादी पहने वाले के बच्चे बनकर लफँगा खड़े इस […]

  • न तुम हो न हम हैं
    फिर भी वो एहसास हर दम है,

    इशारों से बातें करना,
    मंद-मंद न चाह के भी मुस्कुराना,
    तेरी हर एक हलचल को
    मुझे तेरे करीब लाना,
    जिंदगी आज कुछ इस तरह से ही संग है

    न तुम हो न हम हैं
    फिर भी वो […]