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  • JYOTI BHARTI posted an update 7 months, 1 week ago

    होली दरवाज़े पर खड़ी है,
    पर मैं रंग स्याही सी पड़ी हूँ,
    वो तो मुझ सतरंगी से सब रंग दे गया,
    मेरे दामन बस एक रंग से रंग गया,
    बावरा था कहता था काले में जचती है तू,
    और देखो जाते ही मुझे काले से रंग गया।
    आज जहाँ भी जाती हूँ,
    सब काला ही पाती हूँ,
    कही साया तो कभी ज़िन्दगी,
    सब वीरान से है,
    और मैं आज भी उसके बिना बिरान सी हूँ।
    सबसे और खुद से अंजान सी हूँ।