Jyoti

  • Jyoti wrote a new post, Aazadi 1 month ago

    “आधी रात की आज़ादी की सुबह अभी तक मिली नही थी,
    दीवारें कई बार हिली,
    बुनियादें अब तक हिली नहीं थीं ,
    गोरों की गुलामी से निकले तो,
    कुछ दीमक ऐसे लिपट गये,
    समझ सके ना अर्थ आज़ादी का,
    ये शब्दों तक ही सिमट गये थे, […]