Janki Prasad (Vivash)

  • **अमर गीत”**

    आज कहीं भी नहीं उमड़ती
    मन से ऐसी पीर ।
    आज कहाँ ढूढें बतलाओ ,
    पीड़ा की जागीर ।

    जानकी प्रसाद विवश

  • “**मित्रता के तख्त पर”**
    मधुर प्रातः स्मरण ”

    नित शाखें प्यार की हैं झूमती ,
    हर जिंदगी के. दरख्त पर ।
    हर सुवह शाम की दुआ-सलाम,
    करते है मित्रता के तख्त पर ।

    जानकी प्रसाद विवश
    प्यारे मित्रो ,
    मधुर सवेरे […]

  • *प्रातः अभिवादन*

    सुवह सुवह जो मित्रता की
    ना महक आये ।
    जिंदगी व्यर्थ में , दिन -रात सी
    चली जाये ।

    चंद लमहे ही सही ,दोस्तों के
    बीच जियें ,
    जिंदगानी की कहानी नयी
    लिखी जाये ।
    …… . जानकी प्र […]

  • प्यारे मित्रो,
    रविवारीय आनन्दमय सवेरे की,
    मंगलकामनाएँ सपरिवारसहर्ष
    स्वीकारें।

    आपका अपना मित्र
    जानकी प्रसाद विवश

    “उठो भी यार…
    देखो एक […]

  • प्यारे मित्रो
    सुप्रभात अभिवादन ,
    सपरिवारसहर्ष स्वीकार करें….
    आपका अपना मित्र
    जानकी प्रसाद विवश

    “**आपकी खामोशियाँ “**
    *************

    आपकी
    खामोशियाँ
    भी ,
    हर घड़ी
    हैं बोलतीं ,

    मौन […]

  • प्राण से ज्यादा,मित्र हो प्यारे ,
    इस. नश्वर संसार में ।
    तीर्थ राज संगम स्थित है ,
    प्रिय मित्रों के प्यार में ।

    व्यर्थ सभी तीर्थटन होते ,
    बिना मित्रता-तीरथ के ।
    सत्कर्मों के फल मैं मिलते ,
    भल […]

  • जरूरी नहीं , हम गले ही लगाएँ ।
    जरूरी नहीं ,आप मिलने ही आएँ।
    अमर प्रेम का ,ऐसा बंधन हमारा,
    करें याद हम , हम तुम्हें याद आएँ।
    ******जानकी प्रसाद विवश**********

    प्यारे मित्रो ,
    पावन प्रेम से ओतप […]

  • “**मोह रही मन”**
    मोह रही मन सभी के
    फागुनी बयार ।
    शनैः शनेः उभर रहा है
    सृष्टि का निखार ।

    धडकनें सुवह की सरगमें
    सुहावनी।
    भावनाएँ रंगभरी हुईं
    लुभावनी ।

    कामनाओं पर चढ़ा
    छटा काअब खुमार ।

    ,”**प्रातः […]

  • आपकी ख्बाहिसों को
    पूरा करना
    जानता है दिल,

    चले आओ
    सजा लें हम
    किसी दिन,
    स्वप्न की
    महफिल ।

    जानते हैं सभी,
    सपनों को इक दिन,
    टूटना पड़ता,

    टूटता तन, टूटता मन,
    छूट जाती है,
    हर मंजिल ।

    जानकी प्रसाद विवश

  • “**प्रातः अभिवादन “**
    प्यारे मित्रो ,
    सपरिवारसहर्ष
    फागुनी सवेरे की
    उमंगों से भरे हर पल की
    शुभकामनाएँ स्वीकार करें ।

    सविनय
    आपका अपना मित्र
    जानकी प्रसाद विवश,

  • “**जिन्दगी के तजुर्बे”**
    ************

    जिंदगी के तजुर्बे
    सताते
    बहुत हैं ,

    हँसाते बहुत हैं ,
    रुलाते
    बहुत हैं ।

    कभी हों अकेले ,
    हाँ
    बिल्कुल अकेले,

    तजुर्बे
    सा […]

    • जिंदगी के तजुर्बो का बेहद बारीक वर्णन| कम शब्दों में बेहतरीन प्रभाव|

  • “**प्रातः अभिवादन “**
    ***********
    मित्रतामय जगत सारा ,
    मित्रता ही महकती है ।

    गुलाबों की तरह हर पल
    दुख के शूलों के संग रहती।
    निभा कर साथ, सुख दुख में ,
    मित्र के सुख दुख को सहती।

    हर इक जीवन -प […]

  • **छू पाना आसमां को “**
    *************
    छू पाना आसमां को ,
    माना जरा कठिन है ।
    छू जाना दिलों का तो ,
    आसान बहुत होता ।

    विश्वास किसी को भी
    हो पाए नहीं इस पर ।
    विश्वास कर के देखो ,
    आसान बहुत होता ।

    प्य […]

  • *फागुनी सवेरे का अभिनन्दन “*
    ^^^^^^^^^^^^^^^^-^^^^-^

    मित्रता का महकता रहे चंदन ,
    मित्रता का मन करे वंदन. ।
    अमर रहें मित्रता कोष मे ,
    जग करे मित्रता अभिनन्दन ।

    जानकी प्रसाद विवश
    प्यारे मित्रो , […]

  • “* सुवह को नमन “* **********प्यार के गीत गाती ,वसंती सुवह को नमन ।गंध बिखरा रही है ,सुगंधी मित्रता का चमन ।जानकी प्रसाद विवशपरम प्रिय मित्रो ,प्यार की लाली बिखेरतेमधुर प्रभात का प्यार भरा अभिवादनसपरिवारसह […]

  • *मन थिरक उठो…”*
    ***********
    कभी पुराने नहीं रहेंगे
    ये रसभरे , सुरीले गीत ।
    सदा नयापन। देंगे मन को ,
    यह है इन गीतों की रीत।

    आपका अपना मित्र
    जानकी प्रसाद विवश

  • **मोह रही मन”**
    मोह रही मन सभी के
    फागुनी बयार ।
    शनैः शनेः उभर रहा है
    सृष्टि का निखार ।

    धडकनें सुवह की सरगमें
    सुहावनी।
    भावनाएँ रंगभरी हुईं
    लुभावनी ।

    कामनाओं पर चढ़ा
    छटा काअब खुमार ।

    ,”**प्रातः अभ […]

  • **माधवी – सवेरे”**
    ********* सुप्रभात

    माधवी-सवेरे का मन से अभिनन्दन ,
    सुप्रभात, मंगलमय मित्रों का वन्दन ।
    प्राची की लाली की टेर है सुहानी ,
    रजनी की कालिमा का थमता स्पंदन।
    ^^^^^***
    जानकी प्रसाद व […]

  • “* भावना-सागर”*
    *********
    भावनाओं से बँधा संसार है ,
    भावना के बिना , झूठा प्यार है ।
    भावनाओं में अमर विश्वास है ,
    भावना की तरी , बेड़ा पार है ।
    जानकी प्रसाद विवश
    प्यारे मित्रो […]

  • प्राण से प्यारे गणतंत्र,
    पल पल कोटि कोटि प्रणाम।

    “**फूली नहीं समाती,**
    छब्बीस जनवरी।
    खुशियों के गीत गाती
    छब्बीस जनवरी ।

    गांधी भगत बिस्मिल ,
    आजाद बोस की,
    कुर्बानियाँ सुनाती ,
    छब्बीस जनवर […]

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