Janki Prasad (Vivash)

  • डूबकर
    देख लिया ,
    जिस घड़ी
    से ,
    तेरी आँखों में ।

    नहीं अब
    डूबने से ,
    जरा सा भी ,
    डर हमें लगता ।

    जानकी प्रसाद विवश

    प्यारे मित्रो .
    सवेरे की गुनगुनी अनुभूतियों का
    सपरिवारसहर्ष
    हार्दिक अभिवादन.,
    हर प […]

  • भले वक्त में तो सभी ,नित अपनत्व लुटाए ,
    बुरे बक्त , परछांई भी , दूर दूर न दिखाए।
    जानकी प्रसाद विवश

    आदरणीय
    प्यारे मित्रो,
    सवेरे की मधुर छटा में
    आप सभी का हार्दिक अभिवादन स […]

  • शीत के सबेरे में ,
    मित्रता की गर्माहट,
    प्यार मोहब्बत के सूरज की,
    सुनकर आहट ,
    भावों के पंछी चहक उठते ।

    अंगुलिया ठिठुर जाएँ ,
    भावना उनींदी सी ,
    प्यार के गरमागरम संदेश मगर लिखती हैं ।

    – जानकी प्रसाद विवश

  • सुखद है मित्रों का संसार ,
    बरसता निशदिन प्यार अपार।
    नहीं भौतिक है, है अध्यात्म ,
    मित्र की महिमा अपरंपार ।

    – जानकी प्रसाद विवश

  • प्यारे मित्रो…..
    नाचो -गाओ मन, नव-गीत गुनगुनाना ,
    नये वर्ष खुशी खुशी ,सबके मन बहलाना ।

    जन जन का मन से ,यह नम्र निवेदन है ,
    मन की पीड़ा का , प्रस्तुत आवेदन है ।
    मन का उल्लास कबसे, आहत होकर बैठा ,
    कटु अनुभ […]

  • मित्र अपना यह अभिवादन ,
    बहुत मन को सुहाता है ।
    आँख जैसे ही खुलती है ,
    तुम्हारा ध्यान आता है ।
    मै ईश्वर से भी पहले ,बस
    तुझे ही याद करता हूँ ,
    तू जीवन के अँधेरों में ,
    मुझे रस्ता दिखाता है ।
    ****जानकीप्रसाद विवश **

    • मित्र अपना यह अभिवादन ,
      बहुत मन को सुहाता है ।
      अतिसुन्दर

  • सवेरे ही सवेरे हों ,मुसीबत के
    अंधेरे में ,
    मित्रता-सूर्य की किरणें ,बिखर जाएं,
    अंधेरे में।
    जानकी प्रसाद विवश

  • बदला बदला सब कुछ लगता
    हरपल अदल-बदलती आशा ।
    करवट वक्त ले रहा जानेअब कैसी
    बदली पल पल रिश्तों की परिभाषा ।

    प्यारे मित्रो ,सवेरे की मधुर बेला में
    सपरिवारसहर्ष , पुलकित मंगलकामनाएँ
    स्वीकार करें ।

  • कभी कभी जीवन के पथ में,
    ऐसा भी हो जाता है।
    कभी कभी मनचाहा मिलता ,
    मिलकर भी खो जाता है।

  • “*पहला नमन “*
    *—***—**
    हर सुवह का पहला नमन
    आपको अर्पण करें।
    मनमीत मेरे आप खुश हों
    खुशियाँ पदार्पण करें ।
    जानकी प्रसाद विवश
    मेरे परम प्रिय मित्रो ,
    क्रिसमस -प्रेम पर्व की मंग […]

  • तन वदन मन खिलखिलाता ,
    जब किसी का पत्र आता ।

    पत्र के उर में बसे हैं ,
    प्रेमियों के भाव गहरे ।
    दूर हों चाहे भले वे ,
    पत्र से नजदीक ठहरे ।

    पत्र ही ऐसा सुसेवक ,
    दूरियाँ सबकी मिटाता ।

    बहुत दिन तक ज […]

  • आ गया अब शीत का मौसम
    कंपकंपी के गीत का मौसम ।
    झील सरिता सर हैं खामोश
    अब न लहर में तनिक भी जोश
    वृक्ष की शाखें नहीं मचलें
    लग रहा अब है न तनिक होश

    धूप के संगीत का मौसम
    गर्मियों के मीत का मौसम

    उमंगो […]

  • चाहे कुछ भी ना हो दुनिया में,
    यादें तो हमारी हैं ।
    रंगीन प्रेम गाथा ,हमारी है ,
    तुम्हारी हैं ।

  • सर्दियों में धूप मनको
    जिस तरह प्यारी लगे ।
    आपकी छवि व्यथित मन को
    परम सुखकारी लगे ।
    मौन रह.अनकही बातें ,
    शेष कहने को रहीं ।
    जिस जगह से भी गुजरते ,
    आप मिल जाते वहीं । […]

    • अनुपम उपमाओं से परिपूर्ण कविता…सचमुच मन को भा गयी| हमारे साथ शेयर करने के लिए शुक्रिया|

  • आपकी
    मुसकान के
    आधीन,
    यह दिल हो चुका ।
    अब नाजा
    जीते जी
    कभी भी
    हो सके आजाद यह ।
    अब
    इवादत
    प्यार की ,
    करता रहेगा उम्र भर ।
    इनायत
    या शिकायत
    की.,
    करेगा फरियाद यह ।

  • किसी का
    दिल भी ,
    आईने की तरह
    टूट गया।
    लाख
    पुचकार कर
    जोड़ें,
    नहीं जुड़ पाएगा ।
    रास्ता
    जिंदगी का
    बन गया
    आड़ा-टेढ़ा ,
    लाख चाहें ,
    नहीं
    सीधा कभी ,
    मुड़ पाएगा ।

  • अपलक टकटकी लगाकर, देखते ही देखते ।
    जिंदगी कब गुजर जाए, कुछ नहीं इसका पता।

  • निगाहों के रस्ते रस्ते ,
    प्यार का पैगाम दिल तलक पहुंचे ,
    प्यार की पहली नजर ही प्यार की
    पहली सीढ़ी है ।

  • बिखरना फिर सिमट जाना,
    इश्के अंजाम होता है ।
    प्यास दिल की बुझाने को ,
    नजर का जाम होता है।

  • आपका दर्द ,
    दिल को
    इस कदर,
    मुझको तो प्यारा है ।
    दर्द की
    दवा देने में ,
    अपना जीवन
    गुजारा है ।
    बढ़ीं बैचैनियाँ
    जब जब.,
    ना तुमको
    नींद आई है ,
    अपनी रातों को
    आँखों ने,
    रतजगा कर
    गुजारा है ।

    जानकी प्रसाद विवश

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