Janki Prasad (Vivash)

  • “**मोह रही मन”**
    मोह रही मन सभी के
    फागुनी बयार ।
    शनैः शनेः उभर रहा है
    सृष्टि का निखार ।

    धडकनें सुवह की सरगमें
    सुहावनी।
    भावनाएँ रंगभरी हुईं
    लुभावनी ।

    कामनाओं पर चढ़ा
    छटा काअब खुमार ।

    ,”**प्रातः […]

  • आपकी ख्बाहिसों को
    पूरा करना
    जानता है दिल,

    चले आओ
    सजा लें हम
    किसी दिन,
    स्वप्न की
    महफिल ।

    जानते हैं सभी,
    सपनों को इक दिन,
    टूटना पड़ता,

    टूटता तन, टूटता मन,
    छूट जाती है,
    हर मंजिल ।

    जानकी प्रसाद विवश

  • “**प्रातः अभिवादन “**
    प्यारे मित्रो ,
    सपरिवारसहर्ष
    फागुनी सवेरे की
    उमंगों से भरे हर पल की
    शुभकामनाएँ स्वीकार करें ।

    सविनय
    आपका अपना मित्र
    जानकी प्रसाद विवश,

  • “**जिन्दगी के तजुर्बे”**
    ************

    जिंदगी के तजुर्बे
    सताते
    बहुत हैं ,

    हँसाते बहुत हैं ,
    रुलाते
    बहुत हैं ।

    कभी हों अकेले ,
    हाँ
    बिल्कुल अकेले,

    तजुर्बे
    सा […]

    • जिंदगी के तजुर्बो का बेहद बारीक वर्णन| कम शब्दों में बेहतरीन प्रभाव|

  • “**प्रातः अभिवादन “**
    ***********
    मित्रतामय जगत सारा ,
    मित्रता ही महकती है ।

    गुलाबों की तरह हर पल
    दुख के शूलों के संग रहती।
    निभा कर साथ, सुख दुख में ,
    मित्र के सुख दुख को सहती।

    हर इक जीवन -प […]

  • **छू पाना आसमां को “**
    *************
    छू पाना आसमां को ,
    माना जरा कठिन है ।
    छू जाना दिलों का तो ,
    आसान बहुत होता ।

    विश्वास किसी को भी
    हो पाए नहीं इस पर ।
    विश्वास कर के देखो ,
    आसान बहुत होता ।

    प्य […]

  • “* सुवह को नमन “* **********प्यार के गीत गाती ,वसंती सुवह को नमन ।गंध बिखरा रही है ,सुगंधी मित्रता का चमन ।जानकी प्रसाद विवशपरम प्रिय मित्रो ,प्यार की लाली बिखेरतेमधुर प्रभात का प्यार भरा अभिवादनसपरिवारसह […]

  • *मन थिरक उठो…”*
    ***********
    कभी पुराने नहीं रहेंगे
    ये रसभरे , सुरीले गीत ।
    सदा नयापन। देंगे मन को ,
    यह है इन गीतों की रीत।

    आपका अपना मित्र
    जानकी प्रसाद विवश

  • **मोह रही मन”**
    मोह रही मन सभी के
    फागुनी बयार ।
    शनैः शनेः उभर रहा है
    सृष्टि का निखार ।

    धडकनें सुवह की सरगमें
    सुहावनी।
    भावनाएँ रंगभरी हुईं
    लुभावनी ।

    कामनाओं पर चढ़ा
    छटा काअब खुमार ।

    ,”**प्रातः अभ […]

  • **माधवी – सवेरे”**
    ********* सुप्रभात

    माधवी-सवेरे का मन से अभिनन्दन ,
    सुप्रभात, मंगलमय मित्रों का वन्दन ।
    प्राची की लाली की टेर है सुहानी ,
    रजनी की कालिमा का थमता स्पंदन।
    ^^^^^***
    जानकी प्रसाद व […]

  • “* भावना-सागर”*
    *********
    भावनाओं से बँधा संसार है ,
    भावना के बिना , झूठा प्यार है ।
    भावनाओं में अमर विश्वास है ,
    भावना की तरी , बेड़ा पार है ।
    जानकी प्रसाद विवश
    प्यारे मित्रो […]

  • प्राण से प्यारे गणतंत्र,
    पल पल कोटि कोटि प्रणाम।

    “**फूली नहीं समाती,**
    छब्बीस जनवरी।
    खुशियों के गीत गाती
    छब्बीस जनवरी ।

    गांधी भगत बिस्मिल ,
    आजाद बोस की,
    कुर्बानियाँ सुनाती ,
    छब्बीस जनवर […]

  • दोस्ती का अजब सा
    किस्सा है
    दोस्त जीवन का
    अहम
    हिस्सा है ।

    स्वार्थ का
    नामोनिशाँ तक
    है नहीं ,

    जन्म जन्मों का
    अमर रिश्ता
    है ।

    प्रिय मित्रों
    वसंती सवेरे की सरस.
    घड़ियों में
    सपरिवारसहर्ष ,मंगलक […]

    • बहतरीन जी मेरी रचना प्रतियोगिता में है गणतन्त्र में हो सके तो कमेन्ट करें

    • beautiful Kavita

  • “**देख लिया”**
    ******
    डूबकर
    देख लिया ,
    जिस घड़ी
    से ,
    तेरी आँखों में ।

    नहीं अब
    डूबने से ,
    जरा सा भी ,
    डर हमें लगता ।

    जानकी प्रसाद विवश

    प्यारे मित्रो .
    सवेरे की गुनगुनी अनुभूतियों का
    सप […]

  • “**वसंतोत्सव-अभिनन्दन”**
    ******^^^******
    कोयल के स्वर पड़े सुनाई ,
    यह वसंत बेला सुखदायी ।
    मधुऋतु में , माधुर्य पगा है,
    जीवन का हर क्षण ।

    …..जानकी प्रसाद विवश

    प्यारे मित्रो
    वसंत पंच […]

  • “**प्रात:अभिवादन”**
    ****^^^^***
    तेरी इक मुसकराहट पर बहारें
    लौट आती हैं ।
    तेरी इक मुसकराहट पर बहारें ,
    गुल खिलाती हैं ।
    महक जाता है तन मन और
    हर उजड़ा हुआ उपवन ,
    प्यार की वसंती र […]

  • आपके-गीत-क्रमांक-20- दिनांक-16 -01-2018
    खूँटी और दीवार
    गीतकार-जानकी प्रसाद विवश
    साथ तुम्हारा मेरा…साथ तुम्हारा मेरा जैसे
    खूँटी ओर दीवार का। […]

  • सवेरे की मधुर मुसकान का
    अर्चन करें मन से ।
    उजाले की अमर पहचान का ,
    वंदन करें मन से ।
    मित्रतामय उमंगों का चिर स्पंदन,
    निराला है ,
    नमन हो मित्रता तीरथ की महिमा
    सकल तन मन से ।

    जानकी प्रसाद विवश

    प्य […]

  • प्राण से ज्यादा, मित्र हो प्यारे,
    इस. नश्वर संसार में ।
    तीर्थ राज संगम स्थित है ,
    प्रिय मित्रों के प्यार में ।

    व्यर्थ सभी तीर्थटन होते ,
    बिना मित्रता-तीरथ के ।
    सत्कर्मों के फल मैं मिलते ,
    भल […]

  • जीवन के खत पर
    लिखा वो पता हैं ,
    मेरे मित्र ,मेरे लिए ,
    देवता हैं।

    धड़ी चाहे सुख की,
    या हो चाहे दुख की,
    किसी पल नहीं वे ,
    हुए लापता हैं ।

    जीवन में भरते हैं ,
    रिश्तों के मेले ,
    मेरे मित्र […]

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