Dev Kumar

  • तेरी याद आज भी मुझको रुलाती है!
    तेरी याद आज भी मुझको सताती है!
    भूलना मुमकिन नहीं है तेरे प्यार को,
    तेरी याद आज भी मुझको बुलाती है!

    मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

  • हर शक्स जमाने में गुमनाम जैसा है!
    दर्द और तन्हाई की शाम जैसा है!
    जलता हुआ सफर है राहे-मंजिलों का,
    जिन्दगी को ढूँढता पैगाम जैसा है!

    मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

  • तेरी याद न आए तो फिर रात क्या हुई?
    तेरा दर्द न आए तो फिर बात क्या हुई?
    पलकों में अभी अश्क भी आए नहीं अगर,
    तेरे ख्यालों से फिर मुलाकात क्या हुई?

    मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

  • टूटते ख्वाबों के फसाने हैं बहुत!
    जिन्दगी में गम के बहाने हैं बहुत!
    बस तू ही खफा नहीं है अंजाम से,
    शमा-ए-चाहत के परवाने हैं बहुत!

    मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

  • टूटते ख्वाबों के फसाने हैं बहुत!
    जिन्दगी में गम के बहाने हैं बहुत!
    बस तू ही खफा नहीं है अंजाम से,
    शमा-ए-चाहत के परवाने हैं बहुत!

    मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

  • फसाना जिंदगी का अजीब सा होता है!
    हर ख्वाब आदमी का रकीब सा होता है!
    बदली हुई निगाह से डर जाते हैं कदम,
    मंजिलों का मिलना तरकीब सा होता है!

    मुक्तककार -#मिथिलेश_राय

  • तेरे सिवा कुछ भी नजर आता नहीं है!
    ख्वाबों का सफर भी मुस्कुराता नहीं है!
    राह खींच लेती है यादों की इसतरह,
    तेरा ख्याल मुझसे दूर जाता नहीं है!

    मुक्तककार -#मिथिलेश_राय

  • दर्द के दामन में चाहत के कमल खिलते हैं!
    अश्क की लकीर पर यादों के कदम चलते हैं!
    रेंगते ख्यालों में नजर आती हैं मंजिलें,
    जब भी निगाहों में ख्वाबों के दिये जलते हैं!

    मुक्तककार -#मिथिलेश_राय

  • तेरी याद से खुद को आजाद करूँ कैसे?
    तेरी चाहत में खुद को बरबाद करूँ कैसे?
    लब्ज भी खामोश हैं बेबसी की राहों में,
    तेरी मैं तकदीर से फरियाद करूँ कैसे?

    #महादेव_की_कविताऐं’

  • मेरी जिन्दगी गमें-ख्याल बन गयी है!
    तन्हा बेखुदी की मिसाल बन गयी है!
    मेरे दर्द की कभी होती नहीं सहर,
    रात जुदाई में बेहाल बन गयी है!

    मुक्तककार-#मिथिलेश_राय

  • चारो दिशाओं में छाया इतना कुहा सा क्यों है
    यहाँ जर्रे जर्रे में बिखरा इतना धुआँ सा क्यों है
    शहर के चप्पे चप्पे पर तैनात है पुलिसिया
    फिर भी मचा इतना कोहराम सा क्यों है.

    मिलती है हरएक को छप्पर फाड़कर दौलत
    फिर […]

  • तुम मेरी यादों में आते किसलिए हो?
    तुम मेरे दर्द को बुलाते किसलिए हो?
    वक्त की दीवारों में दफ्न हूँ कबसे,
    तुम मेरी रूह को रुलाते किसलिए हो?

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • जख्म मिट गया है मगर मौजूद तेरी निशानी है!
    गुजरे हुए हालात की मौजूद तेरी कहानी है!
    राह देखता रहता हूँ अब भी शामों-सहर तेरी,
    मेरी धड़कनों में हरपल दर्ज तेरी रवानी है!

    मुक्तककार-#मिथिलेश_राय

  • दर्द तेरा कायम है याद भी आ जाती है!
    #शाम_ए_तन्हाई में बेइन्तहाँ सताती है!
    हंसने की जब भी तमन्ना होती है दिल में,
    ख्वाबों की चुभन से मेरी आँख भर आती है!

    मुक्तककार-#मिथिलेश_राय

  • जब भी ख्यालों में यादों की लहर आती है!
    #दर्द की बेचैनी में रात गुजर जाती है!
    अश्कों में घुल जाता है ख्वाबों का आशियाँ,
    मेरी जिन्दगी को तन्हाई तड़पाती है!

    मुक्तककार-#मिथिलेश_राय

  • मेरा ख्याल तेरी यादों से डर जाता है!
    मेरे दर्द को दिल में गहरा कर जाता है!
    जब भी करीब आती हैं बारिशों की बूँदें,
    मौसम चाहतों का अश्कों से भर जाता है!

    मुक्तककार-#मिथिलेश_राय

  • तुम मेरी चाहतों में हरवक्त बेशुमार हो!
    तुम मेरी धड़कनों में आ जाते हर बार हो!
    अब मुश्किल बहुत है रोकना तेरे सुरूर को,
    तुम मेरी निगाहों में ठहरा हुआ खुमार हो!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • आँखों से बहता पानी
    कहाँ एक सा होता है

    कभी खुद के लिए रोता है,
    कभी खुदा के लिए रोता है !

    कभी कुछ पा के रोता है ,
    कभी कुछ खो के रोता है !

    कभी किसी की यादो मे रोता है ,
    कभी किसी को याद करके रोता है !

    कभी खत […]

  • कबतक तेरी याद में तड़पता मैं रहूँ?
    कबतक तेरी चाह में तरसता मैं रहूँ?
    डूबा हूँ मैं कबसे पैमानों में मगर,
    कबतक तेरे दर्द से गुजरता मैं रहूँ?

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

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