Chavi Jain

  • हर शख्स निगाहों में प्यार लिए रहता है!
    हर वक्त जेहन में खुमार लिए रहता है!
    जब कभी रुक जाती है राह मंजिलों की,
    दर्द का जिगर में बाजार लिए रहता है!

    मुक्तककार- #महादेव'(23)

  • जब भी यादों की तस्वीर नजर आती है!
    तेरे ख्यालों की जागीर नजर आती है!
    मैं जब भी ढूँढता हूँ जिन्दगी की राहें,
    तेरी बाँहों में तकदीर नजर आती है!

    महादेव की कविताऐं’

  • मुझको तेरी जुदाई मार डालेगी!
    मुझको गमे-तन्हाई मार डालेगी!
    कबतलक जी पाऊँगा तन्हा इसतरह?
    मुझको गमे-रुसवाई मार डालेगी!

    मुक्तककार- #महादेव’

  • कुछ ख्वाब जिन्दगी में
    हमेशा अधूरे रह जाते हैं।

    अरे दूसरों को क्या समझाऊ मैं,
    अपने ही समझ नहीं पाते हैं।

    अरे हमसे भी तो पूछ कर देखो,
    हम क्या चाहते हैं।

    “सुखबीर” जो अपने विचार प्रगट नहीं करते,
    वह जीते ही, मर जाते हैं।

  • तेरे लिए मैं तन्हा होता जा रहा हूँ!
    तेरे लिए मैं खुद को खोता जा रहा हूँ!
    अश्कों में मिल गयी हैं यादों की लहरें,
    तेरे लिए मैं तन्हा रोता जा रहा हूँ!

    मुक्तककार- #महादेव’

  • हुई है शाम मगर रात को होने दो!
    अपनी तन्हाई में मुझको खोने दो!
    बेकरार ख्वाब हैं आने को नजर में,
    थोड़ी देर चैन से मुझको सोने दो!

    मुक्तककार- #महादेव’

  • कभी कभी मैं खुद से पराया हो जाता हूँ!
    दर्द की दीवार का एक साया हो जाता हूँ!
    जब बेखुदी के दौर से घिर जाता हूँ कभी,
    नाकाम हसरतों का हमसाया हो जाता हूँ!

    #महादेव_की_कविताऐं’

  • तेरी आरजू है फिर करीब आयी सी!
    तेरे हुस्न की तस्वीर मुस्कुरायी सी!
    याद आ रही है तेरी रूबरू लेकिन,
    ढूँढती नजर में दर्द की गहरायी सी!

    #महादेव_की_कविताऐं’

  • कबतक जी सकूँगा नाकाम होते होते?
    कबतक जी सकूँगा गुमनाम होते होते?
    भटक रहा हूँ तन्हा मंजिल की तलाश में,
    कबतक जी सकूँगा बदनाम होते होते?

    #महादेव_की_कविताऐं’

  • कैसे कहूँ कि अब तुमसे प्यार नहीं रहा!
    कैसे कहूँ कि तेरा इंतजार नहीं रहा!
    हरपल करीब होती है तेरी जुस्तजू,
    कैसे कहूँ कि तेरा तलबगार नहीं रहा!

    मुक्तककार- #महादेव’

  • कैसे कहूँ कि अब तुमसे प्यार नहीं रहा!
    कैसे कहूँ कि तेरा इंतजार नहीं रहा!
    हरपल करीब होती है तेरी जुस्तजू,
    कैसे कहूँ कि तेरा तलबगार नहीं रहा!

    मुक्तककार- #महादेव’

  • मैं यादों का कभी कभी जमाना ढूँढता हूँ!
    मैं ख्वाबों का कभी कभी तराना ढूँढता हूँ!
    जब खींच लेती है मुझको राह तन्हाई की,
    मैं अश्कों का कभी कभी बहाना ढूँढता हूँ!

    #महादेव_की_कविताऐं’

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