Chavi Jain

  • वक्त जाता है मगर खामोशी नहीं जाती!
    तेरे हुस्न की कभी मदहोशी नहीं जाती!
    फैली हुई है हरतरफ यादों की ख़ुशबू,
    तेरी चाहतों की सरगोशी नहीं जाती!

    मुक्तककार-#मिथिलेश_राय

  • तेरे दीदार का बहाना मिल ही जाता है!
    तेरी उल्फ़त का तराना मिल ही जाता है!
    कभी थकती नहीं नजरें मेरी इंतजार में,
    तेरी यादों का नजराना मिल ही जाता है!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • मैं इत्तेफाक से गुनाह कर बैठा हूँ!
    तेरे रुखसार पर निगाह कर बैठा हूँ!
    शामों-सहर रहता हूँ बेचैन इसकदर,
    तेरे लिए जिन्दगी तबाह कर बैठा हूँ!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • मेरा जिस्म है मगर जान तुम्हारी है!
    तेरे बिना तन्हा जिन्दगी हमारी है!
    दर्द बरक़रार है तेरी जुदाई का,
    जाम की मदहोशी मेरी लाचारी है!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • तेरा ख्याल मेरी हद से गुज़र रहा है!
    मेरा जिस्म तेरी चाहत से डर रहा है!
    खुली हुई हैं सिलवटें ख्वाबों की नजर में,
    यादों का सफ़र अश्कों में उतर रहा है!

    मुक्तककार-#मिथिलेश_राय

  • तुमसे बार बार मैं बात करना चाहता हूँ!
    तेरी जुल्फ के तले रात करना चाहता हूँ!
    आती हैं हवाएं लेकर जब तेरी ख़ुशबू,
    फिर से एक बार मुलाकात करना चाहता हूँ!

    मुक्तककार-#मिथिलेश_राय

  • तेरा जो दीवाना था कब का मर गया है!
    तेरा जो परवाना था कब का डर गया है!
    कायम था तूफान जो मेरे अरमानों का,
    तेरी बेवफाई से कब का मुकर गया है!

    मुक्तककार -#मिथिलेश_राय

  • तेरा जिक्र दर्द का बहाना बन जाता है!
    मेरी बेखुदी का अफसाना बन जाता है!
    जब भी याद आती है मुझे तेरी दिल्लगी,
    जख्मों का दिल में आशियाना बन जाता है!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • कोई खौफ़ नहीं है मरने से मुझको!
    दामन में अश्कों के बिखरने से मुझको!
    क्या रोकेगी तन्हाई शामों-सहर की,
    जिन्दगी भर इंतजार करने से मुझको!

    मुक्तककार-#मिथिलेश_राय

  • अपनी तमन्नाओं पर मैं नकाब रखता हूँ!
    धड़कनों में यादों की मैं किताब रखता हूँ!
    हर घड़ी तड़पाती है मुझे तेरी गुफ्तगूं,
    दर्द तन्हा रातों की बेहिसाब रखता हूँ!

    मुक्तककार-#मिथिलेश_राय

  • Sukhbir Singh‘s profile was updated 1 week, 5 days ago

  • जिन्दगी मिलती नहीं किसी को सस्ती बनकर!
    कोई तन्हा है कहीं कोई हस्ती बनकर!
    नेकियाँ करते चलो तुम भी कुछ जमाने में,
    जिन्दगी जी लो तुम राहों में मस्ती बनकर!

    मुक्तककार-#मिथिलेश_राय

  • कभी वक्त से हारा हूँ कभी हालात से!
    कभी दर्द से हारा हूँ कभी जज्बात से!
    मैं जीत जाता हर बाजी चाहत की मगर,
    मैं हारा हूँ तेरी बेरुखी की बात से!

    मुक्तककार-#मिथिलेश_राय

  • तुमको एक मुद्दत से अपना बना बैठा हूँ!
    अपनी उम्मीदों का सपना बना बैठा हूँ!
    उलझा हुआ रहता हूँ मैं तेरे ख्यालों में,
    तेरी चाहत को दुर्घटना बना बैठा हूँ!

    #महादेव_की_कविताऐं

  • अपनी तन्हाई को कबतक सहूँ मैं?
    अपनी बेचैनी को किससे कहूँ मैं?
    टपक रही हैं बूँदें यादों की मगर,
    अश्कों के भंवर में कबतक रहूँ मैं?

    मुक्तककार -#मिथिलेश_राय

  • जब वादों की जश्ने-रात होती है!
    ख्वाबों की नजरों से बात होती है!
    ढूंढती है सब्र को मेरी जिन्दगी,
    जब भी यादों की बरसात होती है!

    मुक्तककार -#मिथिलेश_राय

  • तेरी याद में हम रो भी लेते हैं!
    तेरे लिए गमजदा हो भी लेते हैं!
    जब रंग सताता है तेरे हुस्न का,
    खुद को मयकदों में खो भी लेते हैं!

    रचनाकार-#मिथिलेश_राय’

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