Chavi Jain

  • तुझे तराशकर फिर कुछ और मैं तराश न सका,
    तेरे चेहरे के सिवा आँखों में मैं कुछ उतार न सका,

    बड़ी मशक्कत लगी मुझको तुझको बनाने में मगर,
    तेरी रगों में मोहब्बत के रंग मैं उतार न सका।।
    राही (अंजाना)

  • तुझे तराशकर फिर कुछ और मैं तराश न सका,
    तेरे चेहरे के सिवा आँखों में मैं कुछ उतार न सका,

    बड़ी मशक्कत लगी मुझको तुझको बनाने में मगर,
    तेरी रगों में मोहब्बत के रंग मैं उतार न सका।।
    राही (अंजाना)

  • चाहे बिक जाएँ मेरी सारी कविताएं पर,
    मैं अपनी कलम नहीं बेचूंगा,

    चाहे लगा लो मुझपर कितने भी प्रतिबन्ध पर,
    मैं अपने बढ़ते हुए कदम नहीं रोकूँगा,

    बिक ते हैं तो बिक जाएँ तन किसी के भी,
    पर मैं अपनी सर ज़मी […]

    • वाह बहुत सुन्दर रचना!
      और सपत इसी पर अटल रहे और निरंतर प्रयास करते रहे लेखन का जिससे समाज को एन नया ऐना (दर्पन) मिल सके।।

  • मेरे दर्द को तेरा अफ़साना याद है।
    मेरे ज़ख्म को तेरा ठुकराना याद है।
    लबों को खींच लेती है पैमाने की तलब-
    हर शाम साक़ी को मेरा आना याद है।

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • ज़माने के आईने में चेहरे सभी अजीब दिखते हैं,
    सच से विलग मानों जैसे सभी बेतरतीब दिखते हैं,

    जब भी खुद को खुद ही में ढूंढना चाहते हैं हम,
    अपने ही चेहरे पर गढे कई चेहरे करीब दिखते हैं,

    ये कैसी ता […]

  • हमेशा किसी की तलाश रहती है मुझे
    लगता है जो कुछ है वो अधूरा है
    अल्फ़ाजों में कहां समाता है
    जो जहन में गूंजता है वो ही पूरा है

  • जिनके एक आवाहन पर सबने अपने हाथ उठाये थे,
    कदम-कदम पर अंग्रेजी शासन के छक्के साथ छुड़ाए थे,

    जिनके कहने पर अस्त्र वस्त्र सब मिलकर साथ जलाये थे,
    सत्य-अहिंसा के अचूक तब शस्त्र सशक्त उठाये थे,

    सच की ताक […]

  • साहिर तेरी आँखों का जो मुझपर चल गया,
    खोटा सिक्का था मैं मगर फिर भी चल गया,

    ज़ुबाँ होकर भी लोग कुछ कह न सके तुझसे,
    और मैं ख़ामोश होकर भी तेरे साथ चल गया।।

    समन्दर गहरा था बेशक मगर डुबो न सका,
    के तेरे […]

  • मोहब्बत के ख्वाब ने ये कैसा इत्तेफ़ाक कर दिया,

    दिल्लगी ने धड़कन को ही दिल के खिलाफ़ कर दिया,

    अच्छी ख़ासी तो चल रही थी ज़िन्दगी ‘राही’ अपनी,

    फिर क्या हुआ जो इस नशे ने तुम्हें ख़ाक कर दिया।।

    राही (अंजाना)

  • खिलौना समझ कर ज़िन्दगी से देखो खेलने लगे,
    चुप रहने वाले भी देखो ज़रा कितना बोलने लगे,
    चौपाल लगाते दिख जाते थे गाँव में जहाँ तहाँ जो,
    आज साथ रहने वाले भी देखो अकेले डोलने लगे,

    मिसाल बन जाते थे जब अजन […]

  • चाँद तारे आसमाँ सब की निगरानी करना,

    जब तक मैं न आऊँ इतनी मेहरबानी करना,

    जिस्म ऐ मोहब्बत पर जब तक रूह का रंग न चढ़े,

    गुज़ारिश ये के तुम इस कागज़ी पैहरन की क़ुरबानी करना,

    जो मिलूँ न यूँही हकीकत के समन् […]

  • मैं अधूरा सा हूँ तेरे नाम के बग़ैर।
    यादों की तड़पाती हुई शाम के बग़ैर।
    मैं देखकर ज़िन्दा हूँ तेरी तस्वीरें-
    आँखें भी सोती नहीं हैं जाम के बग़ैर।

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • कितने चेहरे सामने आते जाते है हर रोज
    फिर क्यों कोई इक चेहरा दिल में अटक जाता है

  • बनाकर खुद से खुद पर ही हैरान हो गया,

    मेरी माँ की सूरत के आगे वो बेजान हो गया,

    भेज दिया जिस पल मेरे घर में माँ को उसने,

    उसका खुद का घर जैसे मानो वीरान हो गया,

    आसमाँ पर जब तब नज़र चली जाती थी कभी, […]

  • कौन सा रंग भरू,
    किस रंग से उकेरू मैं जिंदगी की तस्वीर
    फीकी जिंदगी को र्ंग नही जचते|

  • बेचकर चूड़ियाँ अपना घर चलाया करती है,

    चेहरे पर गम छुपाये कैसे मुस्कराया करती है,

    रहती तो है रंग बिरंगे काँच के टुकड़ों के संग,

    मगर बेरंग जीवन को यूँही बहलाया करती है।।
    राही (अंजाना)

  • दिल से दिल तक अपना रस्ता बना लेती है,
    एक हिंदी है जो सबको अपना बना लेती है।।
    राही (अंजाना)
    हिंदी दिवस की शुभकामनाएं।

  • हजारों पहरों के बीच भी चेहरा तेरा देख लेता हूँ,
    मेरी आँखों में तुझको मैं इतना गहरा देख लेता हूँ।।
    राही (अंजाना)

  • तेरी गली से आज फ़िर होकर गुज़रा हूँ।
    तेरी गली से आज फ़िर रोकर गुज़रा हूँ।
    आवाज़ दे रही थी मुझे तेरी तिश्नगी-
    तेरी गली से दर्द को छूकर गुज़रा हूँ।

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • टूट गई साँसों की माला जैसे कोई साज,
    सुनी नहीं किसी ने मेरे दिल की वो आवाज़,
    बन्द हुए जब अंत समय में आँखों के मेरे काज,
    उड़ गए मेरे पंख पखेरू जैसे कोई बाज़।।
    राही (अंजाना)

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