Antariksha Saha

  • छोड़ कर घरबार अपना,
    सीने पर गोली झेली

    बहा के अपने रक्त को,
    बचा ली मांगों की रोली

    खेल सकें हम सब होली,
    सीने पर झेली गोली

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • शिव की पूजा करते हो ,
    शक्ति की करते हो हत्या

    समाज देश पर आती है,
    नित नयी विपदा

    मान रखो नारी का,
    नारी सम्मान करो

    मत मारो गर्भ में इसको,
    धरती पर कन्या आने दो

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • दुर्गा काली लक्ष्मी का,
    शिव ने भी सम्मान किया

    नतमस्तक होकर शिव ने,
    इनको ही प्रणाम किया

    शिव ने ही नारी को,
    शक्ति का है नाम दिया

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • मानवता तुम खो चुके,
    बस पैसा दिखता है

    क्या लाया था तू इस जग,
    जिसके लिए तू रोता है

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • चारो और है फैला,
    आखिर ये कसा मोह

    इंसान खुद को है मार रहा,
    लगी ये कैसी होड़

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • कान्हा ओ कान्हा,
    मेरा भी माखन चुरा ले

    माखन चुरा के कान्हा प्यारे,
    चित भी मेरा चुरा ले

    जो हो मन में मेरे विकार,
    इनको भी तू चुरा ले

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • प्रेम की डोरी से,यशोदा की लोरी से
    बंध गए नन्द किशोर

    छल कीन्हे बड़े कान्हा,प्यारी मईया से,
    बहुत प्रेम है इनको, ग्वाल औ गैया से

    माखन चोरी से,ब्रज की होरी से
    बंध गए नन्द किशोर

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • ऊँचे ऊँचे पर्वत ,
    पर्वत पर ये रास्ते

    किसने बनाये ये सब,
    और बनाये किसके वास्ते

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • जल उठी क्रांति मशाल,
    क्रांति के तुम दूत बनो

    मातृ भूमि से प्यार है तो,
    भारत माँ के दूत बनो

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • अर्पण तन मन धन कर दो,
    स्व मातृ भूमि के लिए

    रहे वर्चश्व स्व का सदा,
    ना हो बंधन,मुक्ति के लिए

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • काल कलवित काल में,
    मशाल जो जलाएगा

    वन्दन अभिनन्दन है उसका,
    वह वीर कहलायगा

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • श्वेत माँ का आँचल है,
    दाग नहीं लगने देना

    निर्दोषों का रक्त,बहे का कभी
    भारत का मान सदा रखना

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • पर्वत से भाल,
    नदियों की चाल
    ये तरु विशाल,
    मन मेरे बसे हैं

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • मेरा देश प्रेम,मन है बेचैन
    कब शांति सन्देश मिलेंगे

    माटी से प्रेम,
    इसकी सुगंध में रमे हैं

    होऊं निहाल,
    जब भारत दर्श किये हैं

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • क्या कभी विजय नहीं देखी,
    जो इतना घबराते हो

    जिसमे कवि का गुण नहीं,
    और कवि कहलाते हो

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • न छेड़ना ऐ अरि तू
    नहीं तेरी खेर नहीं,

    मैं हूँ शांत चित्त,
    तुझसे मेरा बैर नहीं

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • जग मैं आया क्या करने,
    ऐ भी मानव भूल गया

    स्वार्थ हेतु,पथ भ्रष्ट हो,
    कितना स्तर गिर गया

    जग मैं आया क्या करने,
    ऐ भी मानव भूल गया

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • साहित्य सृजन इक,
    विश्व प्रेरणा होती है

    मिले प्रेरणा हर शब्द से,
    वो कविता ही माला होती है

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • अकारण ही मनुज,
    क्यों मनुज से जलता है

    विजय पाने की होड़ मैं,
    विचारों से गिरता है

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • मैं तूफाँ नहीं,
    क्यों मुझसे डरते हो

    ईर्ष्या मैं क्यों,
    जल जल कर मरते हो

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

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