Antariksha Saha

  • मुझको कभी मेरी तन्हाई मार डालेगी!
    मुझको कभी तेरी रुसवाई मार डालेगी!
    कैसे रोक सकूँगा मैं तूफाने-जख्म़ को?
    मुझको कभी बेरहम जुदाई मार डालेगी!

    #महादेव_की_कविताऐं’

  • मैं करता हूँ तुमसे मोहब्बत,
    अब खुद को सताना बंद करो !
    देता हूँ खूने ए दिल तुम्हे,
    हाथों में मेहंदी रचाना बंद करो !!
    जो हुये हैं गीले सिकवे ,
    उनका इल्जाम लगाना बंद करो !
    मुझसे बात करने […]

  • इन नजरों से देखो प्रियवर
    पार क्षितिज के एक मिलन है
    धरा गगन का प्यार भरा इक
    मनमोहक सा आलिंगन है….

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  • यूँ तो हर रोज गुजर जाते हैं कितने ही लोग करीब से,
    पर नज़र ही नहीँ मिलाते कोई इस बचपन गरीब से,
    रखते हैं ढककर वो जो पुतले भी अपनी दुकानों में,
    वो देखकर भी नहीं उढ़ाते एक कतरन भी किसी गरीब पे,
    बचाते तो अक्सर दिख […]

  • गरीबी है कोई तो बिस्तर तलाश करो,
    रास्तों पर बचपन है कोई घर तलाश करो,
    कचरे में गुजर रही है ज़िन्दगी हमारी,
    कोई तो दो रोटी का ज़रिया तलाश करो,
    यूँ तो बहुत हैं इस ज़मी पर बाशिन्दे,
    मगर इस भीड़ में कोई अपनों का च […]

  • दे कर मिट्टी के खिलौने मेरे हाथ में मुझे बहकाओ न तुम,

    मैं शतरंज का खिलाड़ी हूँ सुनो, मुझे सांप सीढ़ी में उलझाओ न तुम,

    जानता हूँ बड़ा मुश्किल है यहाँ तेरे शहर में अपने पैर जमाना,

    मगर मैं भी ज़िद्दी “राही” हूँ मुझ […]

  • किसी आयत की तरह रात दिन गुनगुनाता रहा हूँ तुझे,
    सबकी नज़रो से बचाकर अपनी पलकों में छिपाता रहा हूँ तुझे,
    मेरे हर सवाल का जबाब तू ही है मगर,
    फिर भी एक उलझे सवाल सा सुलझाता रहा हूँ तुझे,
    यूँ तो बसी है तू मेरी दि […]

  • मेरा दर्द तेरा ही नाम बोलता है!
    मेरी जिन्दगी का अंजाम बोलता है!
    बंदिशें जमाने की मगरूर हैं लेकिन,
    तेरी आरजू का पैगाम बोलता है!

    #महादेव_की_कविताऐं'(23)

  • मेरा दर्द तेरा ही नाम बोलता है!
    मेरी जिन्दगी का अंजाम बोलता है!
    बंदिशें जमाने की मगरूर हैं लेकिन,
    तेरी आरजू का पैगाम बोलता है!

    #महादेव_की_कविताऐं'(23)

  • गुजरता रहा उसकी आँखों से हर रात किसी भरम सा मैं,
    फिर एक रोज़ खुद ब खुद उसके ख्वाबों से बाहर निकल आया मैं,
    छुप कर बैठा रहा मैं एक झूठ की आड़ में बरसों,
    फिर एक रोज किसी सच्ची ज़ुबान सा बाहर निकल आया मैं,
    ईमारत […]

  • अब नहीं होगा जिक्र आपका हमारे आशियाने में
    न होगी नज्म कोई आपके नाम से

  • मेरी जिन्दगी को तन्हाई ढूँढ लेती है!
    मेरी हर खुशी को रुसवाई ढूँढ लेती है!
    ठहरी हुई हैं मंजिलें अंधेरों में कबसे,
    मेरे दर्द को तेरी जुदाई ढूँढ लेती है!

    #महादेव_की_कविताऐं’

  • Sridhar and Profile picture of Ritu SoniRitu Soni are now friends 1 week, 2 days ago

  • आओ बैठो संग मेरे एक एक कप चाय हो जाए,
    फिर से बीते लम्हों की चर्चा खुले आम हो जाए,
    कह दूँ मैं भी अपने दिल की, कहदो तुम भी अपने दिल की,
    और फिर तेरे मेरे दिल का रिश्ता सरेआम हो जाए,
    वैसे तो हर रात होती रहती है […]

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