अंकित तिवारी

  • जब भी मैं तुझसे कहीं पर मिलता हूँ,
    सोचता हूँ कि कम से कम आज तो,
    तेरे आँचल में सर रख कर तुझको
    निहारता हूँ,
    इसी तमन्ना में अक्सर मेरा तुझको यूँ ही देखना,
    मेरे देखने पर तेरा शरमा कर नज़रे झुका लेना,
    फिर तिरछी निगाहो […]

  • मुबारक हो तुमको एक नई रोशनाई,,
    चाहतों के समुंदर की प्यारी गहराई,,
    क्या तोहफा दूँ तुमको, समझ नहीं आता,,
    तुमने ने तो सारी दुनिया हैं महकाई,,

    हर तरफ अपनी मुस्कान बिखेरते रहना,,
    गमो को तो बस भैस चराने भेज दे […]

  • हाँ,, मैंने लोगो को खुद में ही बदलते देखा हैं!!
    उनके जज्बाती हम को अहम बनते देखा हैं,
    कल तक जो सबको साथ लेकर चलने की बात करते थे,,,
    आज उनके खिलाफी ख्वाबो को भी अनाथ होते देखा हैं!!

    गलत सोचता था कि ना […]

  • छु न सके हथियार जिसे, उसे वो नजरो से घायल करते रहे,,
    हम भी बने हिम्मती इतने,, वो वार करते रहे, हम हलाल होते रहे!!
    कल तक मिल्कियत की जिसकी मिसाले देता था जमाना,
    उसे ही वो होठों के जाम पिलाते रहे,, हम भी शौक […]

  • बहुत दिन हो गए उसके ख्यालो की आंधी में बसे हुए,,चलो आज उसकी एक तस्वीर बनाते हैं,, उसकी अल-कायदा सी आँखे हैं,, जो बस मार ही डालती हैं,,उसकी बुलडोज़र सी बाते हैं,, जो बस गिरा ही डालती हैं,,लगता […]

  • मैं क्यों सोचु वो मेरे बारे में क्या सोचेगी,
    मुझे अच्छा लगता हैं उसे रोज सुबह सुबह गुड मोर्निंग विश करना,,
    जानता हूँ कोई रिप्लाई नहीं आएगा फिर भी उसके मैसेज का इन्तजार करना ,,,
    अरे अच्छा लगने से याद आया कि वो ज […]

  • लड़कपन की बात ही कुछ और थी, तब तो मेरी भी आँखों में सपने सुहाने थे !
    हाथों में हाथ डाल कर, सीखेगी दुनिया हमसे प्यार करना, कुछ ऐसे वादे हमारे थे!
    चलता तो रहा मैं सिर्फ उसको देख कर, उस पर विश्वास कर, अनजानी सी राह […]

  • कभी गौर से देखना खुद को आईने में, खुद ही खुद में ना खो जाओ तो कहना,,
    कभी पासजाकर देखना गुलाब के, खुशबुसे खुद ही ना बिखर जाए तो कहना,,
    बहुत नाज़ कर रही हैं लहरे आज कल खुद के इठलाव, बलखाव, झुमाव पर, […]

  • इतना आसान हूँ मैं कि हर किसी को समझ में आ जाता हूँ,,
    शायद तुमने ही मुझे पन्ने छोड़-छोड़ कर पढ़ा था!!
    इसलिए हक हैं तुझे,, तू भी तो मुझसे दूर सकता हैं,,
    मेरा भी मन तो तेरी खातिर दुनिया को भुला बैठ […]

  • ऐ दिल,,,, सिर्फ धड़क

  • वक़्त बदलेगा किसी वक़्त पर सोचा इस कदर से नहीं,
    पिलाकर नजरो से हाला, फिर बोला कम जहर से नहीं,,
    इज्जत बहुत हैं तेरी दिल में, तुझसा दोस्त ना पाऊँगी,
    मैं प्यार तुझी से करती हूँ,, मगर उस नजर से नहीं,,

    उसने तो हर ए […]

  • बहुत सो लिए हम,, अब हमारे जागने की बारी हैं!!!
    बहुत लूटा परिंदों ने, अब तड़पने की उनकी बारी हैं!!!
    मन हमारे अकेले थे, सो वार कर गये वो हम पर,,
    अब एकजुट होकर कुछ कर गुजरने की बारी हैं!!
    28 राज्य और 3 देशों में ब […]

  • मन में जो इतने ख्वाब बने, वो आखिर किसे समझाते हो,
    लिखते इतना अच्छा हो पर जताकर किसको पास बुलाते हो,,
    तुम्हारे मन में भी फिर-फिर कर यह सवाल आता होगा,,
    बहुत हरे-भरे रहते हो, पर अंदर-अंदर क्यों घुटीयात […]

  • मन हमारे आजकल अपनेपन की परिभाषाये बदल रहे हैं,,
    सारे प्यारे दोस्त हमारे,, अब भीड़ सामान ही लग रहे हैं,,
    पराई नगरी में भी अकसर लोगों में घुल जाया करता था,,
    अब खुद की बस्ती में भी यूँ हीं,, तनहा- मारे रम रहे […]

  • ये जहाँ तो सबका हैं,, जिसे हम सबने मिलकर संवारा हैं,,
    बस किसी गर्दिश की बंदिश में फंसा मेरा सितारा हैं,,
    कहती,, मंजूर नहीं उसको सामने खुदा के भी हाथ फैलाना,,
    अतः मेरे हाथ वाले कटोरे में गोलगप्पे खाने का […]

  • सबका जन्मदिन आता हैं, आज तेरा भी हैं, इसमें खास कौन सी बात हैं
    जो हाथ जोड़े, गिड़गिड़ाये, उसकी ही सुनते हो तुम,, ये कौन सी बात हैं,,
    कितनी भी परिक्षाये ले लो तुम इस सुदामा की,,
    मगर कृन्दन […]

  • ख्वाबो में भी अकेले होने पर जब बस शब्दों का सहारा होता हैं,,
    खुद की आधी-अधूरी सुनने पर भी जब मन छठपटा रहा होता हैं,,
    हालातों से बाहर आते ही जब ख्यालात नजर आ जाते हैं,,
    ह्रदय हारकर तन बिसराकर खुद वहाँ पहुँच तो जा […]

  • किसी की साँसों में जो घुल कर बोले,, उसका नाम कविता हैं,,
    आत्मा को जो परमात्मा से मिलाये,,  उसका नाम कविता हैं,,
    नवयुवती श्रृंगार हैं करती,, ना जाने किन किन बहानो पर यहाँ,,
    वृधा को जो भावनात्मक परिपूर् […]

  • काश! मेरे चाहने भर से मेरे पास वो होता ।
    खुद से जाग कर के वो मुझी में सो गया होता ।
    दौलतें सारे जहाँ की मैं लुटा देता उसी पर गर,
    ज़रा सा मुस्करा कर उसने मुझको खरीद लिया होता ॥

    निहायती खूबसूरत रूप न […]

  • आख़िरकार थक कर जिन्दगी मुझसे बोल ही पड़ी!!
    यूँ कब तक खुद से भागते रहोगे, जरा सा ठहरो,
    ठंडा-वंडा पानी पी!!

    जरा झांक कर तो देखो अपने अतीत में,
    जरा नजरे तो मिलाओ पुरानी प्रीत से!!

    जब देखा पी […]

  • Load More