Anirudh sethi

  • सामने है साकी मंजिल भी शराब है!
    मेरी जुस्तजू में तेरा ही शबाब है!
    तिश्नगी जाती नहीं है तेरी जिगर से,
    तेरी #अदा_ए_हुस्न इतनी लाजवाब है!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • कभी गम कभी मुझको तन्हाई मार देती है!
    तेरी तमन्नाओं को जुदाई मार देती है!
    मैं राहे-इंतजार में बैठा हुआ हूँ लेकिन,
    ऐतबार को तेरी रुसवाई मार देती है!

    मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

  • तेरी बेवफाई से कहीं मैं बदल न जाऊँ?
    इंतजार की ज्वाला से कहीं मैं जल न जाऊँ?
    मुझे दर्द डराता है हर वक्त तन्हाई में,
    सब्र के चट्टानों से कहीं मैं फिसल न जाऊँ?

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • कुछ लोग जिन्दगी में यूँ ही चले आते हैं!
    कुछ लोग वफाओं को यूँ ही भूल जाते हैं!
    कई लोग तड़पते हैं किसी की जुदाई में,
    कुछ किसी के दर्द पर यूँ ही मुस्कुराते हैं!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • मैं जिन्दगी में मंजिले-मुकाम तक न पहुँचा!
    मैं जिन्दगी में प्यार के पयाम तक न पहुँचा!
    यादों की डोर से बंधा हूँ आज भी मगर,
    मैं अपनी चाहतों के अंजाम तक न पहुँचा!

    रचनाकार – #मिथिलेश_राय

  • किसतरह तेरी यादों की रात जाएगी?
    किसतरह तेरे गम की सौगात जाएगी?
    जागे हुए हैं ख्वाब भी आँखों में कबसे,
    कब तेरी चाहत से मुलाकात जाएगी?

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • तेरी उम्र तन्हाई में गुजर न जाए कहीं!
    तेरी जिन्दगी अश्कों में बिखर न जाए कहीं!
    क्यों इसकदर मगरूर हो तुम अपने हुस्न पर?
    कोई गम कभी दामन में उतर न जाए कहीं!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • आरजू हालात की मोहताज नहीं होती है!
    ख्वाहिशों में लफ्जों की आवाज नहीं होती है!
    जब रोक देती है कदमों को तकदीरे-मंजिल,
    हर आदमी की कोशिश आगाज नहीं होती है!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • आरजू हालात की मोहताज नहीं होती है!
    ख्वाहिशों में लफ्जों की आवाज नहीं होती है!
    जब रोक देती है कदमों को तकदीरे-मंजिल,
    हर आदमी की कोशिश आगाज नहीं होती है!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • जब हमारा किसी से रिश्ता टूट जाता है!
    प्यार का हाथों से गुलिस्ताँ छूट जाता है!
    हम खोजते हैं मंजिलें वफाओं की लेकिन,
    रास्तों में वक्त का फरिश्ता रूठ जाता है!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • आज भी मुझको तेरा हसरत-ए-दीदार है!
    आज भी मेरी नजर को तेरा इंतजार है!
    जोड़ता रहता हूँ तेरी चाहतों की कड़ियाँ,
    आज भी मुझको तमन्ना तेरी बार बार है!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • मैं तेरी तमन्ना को छोड़कर आया हूँ!
    मैं दर्द की बंदिश को तोड़कर आया हूँ!
    मैं भूल गया हूँ मंजिलें राह-ए-इश्क की,
    अश्कों के तूफान को मोड़कर आया हूँ!

    मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

  • मेरा सकून तेरी मुलाकातों में है!
    तेरी तमन्ना दिल के जज्बातों में है!
    हरवक्त खींच लेती है तेरी जुस्तजू,
    तेरी यादों की खूशबू रातों में है!

    मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

  • जबसे तेरी चाहत में नाकाम हो गया हूँ!
    दर्द और तन्हाई का पैगाम हो गया हूँ!
    मैं ढूंढता रहता हूँ सब्र को पैमानों में,
    तेरी याद में भटकी हुई शाम हो गया हूँ!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

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