Anirudh sethi

  • तन्हा रात हुई है फिर कुछ होने को है!
    किसी की यादों में जिन्दगी खोने को है!
    चाँद तमन्नाओं का फिर आया है नजर,
    मेरी जुस्तजू इरादों की रोने को है!

    मुक्तककार -#मिथिलेश_राय

  • पीली-पीली भीनी-भीनी सरसों की खुशबू ले कर आया है,

    गुलशन के फूलों पर जैसे रंग बसन्ती छाया है,

    ठिठुर रहे थे सर्दी से जो सिकुड़ -सड़क किनारों पर,

    उजला उजला सूरज सबको राहत देने आया है,

    खबर मिली है पीपल पर कोपल, नीम बौर पर छाया है,

    छिपकर बैठे थे जो पंछी सबने मिल पंख फैलाया है,

    कोयल के स्वर ने हर जन के कानों को सहलाया है,

    हर्षित मन फुलवारी में…[Read more]

  • कभी न कभी हमको हमारा मिल ही जाता है!
    कभी न कभी हमको सहारा मिल ही जाता है!
    जब भी चल पड़ते हैं कदम हिम्मत की राह पर,
    डूबती कश्ती को किनारा मिल ही जाता है!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • जरूरत पे ली गई क़िस्त की कीमत, जान देकर जब किसी को चुकानी पड़े,

    बह रहे यूँही जल को बचाने की खातिर किसी को, नल पर भी जब ताले लगाने पड़े,

    प्यास पानी की हो जब बुझानी किसी को, तो चन्द बूंदों के पैसे चुकान […]

  • दिल है धड़कन है अभी तो जान है बाकी,
    जन्दगी के सफर में कई इम्तेहान हैं बाकी,

    जो प्रश्न हैं पूछे बड़े ज़ालिम ज़माने ने,
    निरउत्तर कर दिखाने का अभी अभिमान है बाकी,

    डुबाने को जो बैठे है तुम्हें पल प […]

  • दिल है धड़कन है अभी तो जान है बाकी,
    जन्दगी के सफर में कई इम्तेहान हैं बाकी,

    जो प्रश्न हैं पूछे बड़े ज़ालिम ज़माने ने,
    निरउत्तर कर दिखाने का अभी अभिमान है बाकी,

    डुबाने को जो बैठे है तुम्हें पल प […]

  • Shakun Saxena posted an update 3 days ago

    सरहद के दोनों ओर है रैन-बसेरा तितलियों का,
    दोनों ही मुल्कों पर है जैसे पहरा तितलियों का,

    सुबह से शाम बातें हवाओं से करती हैं,
    मौसम दीवाने से है जैसे रिश्ता गहरा तितलियों का,

    खबर है सबकी खबरदार रहो इनसे,
    कहता है रंग सुनहरा तितलियों का॥
    राही (अंजाना)

  • आप जबसे जिन्दगी में मिल गये हैं!
    रास्ते मंजिल के फिर से खिल गये हैं!
    जागे हैं ख्वाबों के पल निगाहों में,
    जख्म भी जिगर के जैसे सिल गये हैं!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • क्यों तुम भटक गये हो वस्ल की राहों में?
    क्यों तुम बिखर गये हो दर्द की आहों में?
    ढूँढती हैं मंजिलें रफ्तार हिम्मत की,
    क्यों तुम नजरबंद हो खौफ की बाँहों में?

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • जबसे तेरे दर्द का पैगाम आ गया है!
    तबसे मेरी जिन्दगी में जाम आ गया है!
    मैं क्या करूँ नुमाइश अपनी तमन्नाओं की?
    जब तेरा बेवफाओं में नाम आ गया है!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • तुम मेरी जिन्दगी में खास बन गये हो!
    तुम मेरी मंजिलों की प्यास बन गये हो!
    हर वक्त तड़पाते हो आकर यादों में,
    तुम मेरे दर्द का एहसास बन गये हो!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय (23)

  • Shakun Saxena and Pankaj Soni are now friends 1 week ago

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