Ajay Amitabh Suman

  • वजन ईंटो का उठाकर भी हल्का लगने लगा,
    कन्धों पे जिम्मेदारी का जो हल्ला लगने लगा।।
    राही अंजाना

  • बच्चे की खातर माँ कितने ही दान निकाल देती है, M
    जिस्म से अपनी सौ बार जैसे जान निकाल देती है,

    भूख से बिलखता गर दिख भी जाये कोई मासूम तो,
    कुछ सोचे बिन दुपट्टे से सारा सामान निकाल देती है।।

    राही अंजाना

  • न जाने किस-किस का हसीन आशियाना हूँ मैं,
    लोग कहते हैं के खुले ज़माने का फ़साना हूँ मैं,

    जो उखाड़ने की जद्दोजहद में हैं जड़ों को मेरी,
    उनसे खुले दिल से कहता हूँ के कोई नामा हूँ मैं।।

    राही अंजाना
    नामा […]

  • ख्वाबों ख्यालों में किसी का कोई पहरा नज़र नहीं आता,
    जो नज़र में आता तो उसका कोई चहरा नज़र नहीं आता,

    घूमती गुमराह सी नज़र आती हैं जो खामोश राहें हमको,
    उन राहों पे ढूंढ़े से दूर तलक कोई ठहरा नज़र नहीं आता,

    राही अंजाना

  • साद और बर्बाद भी हुआ मौला
    प्यार भी किया नफरत भी किया मौला

    गुनाह भी किया मौला
    शफा भी किया

    अंत में रुका जहा तोह पिटारा खाली था
    जो कमाया वोह रह गया मौला

    तू कही भी नहीं दिखा मौला
    बस लोग थे गिने चुने […]

  • तेरे बग़ैर तेरी तस्वीरों का क्या करूँ?
    मैं तेरे ख़्यालों की जंज़ीरों का क्या करूँ?
    अश्क़ों को छुपा लेता हूँ पलकों में लेकिन-
    मैं तेरे सपनों की ज़ाग़ीरों का क्या करूँ?

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • तेरे बग़ैर तेरी तस्वीरों का क्या करूँ?
    मैं तेरे ख़्यालों की जंज़ीरों का क्या करूँ?
    अश्क़ों को छुपा लेता हूँ पलकों में लेकिन-
    मैं तेरे सपनों की ज़ाग़ीरों का क्या करूँ?

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • चेहरे हर एक रोज बदलने का शौख रखते हैं,
    कुछ लोग अपने आप को बड़ा बेख़ौफ़ रखते हैं।।

    राही अंजाना

  • छोटी सी उमर में बदल कर देखो चाल बैठ गया,
    पहनके इंसा ही जानवर की देखो खाल बैठ गया,

    बड़ी बहुत हो गई ख्वाइशों की बोतल उस दिन से,
    रिश्तों का कद भूल जब कोई देखो नाल बैठ गया,

    मनाया मगर माना […]

  • ज्ञान की पोथियाँ सारी चन्द पैसों में तोल लेता हूँ मैं,
    जो भी जब भी मुँह में आ जाये यूँही बोल देता हूँ मैं,

    समझ पाता नहीं हूँ किताबों में लिखे काले अक्षर मैं,
    सो तराज़ू के बाट बराबर ही सबका मोल लेता हूँ मैं […]

  • मन की बातो को कलम के सहारे से इशारा देता हूँ
    मैं अंजाना होकर भी कुछ लहरों को किनारा देता हूँ,

    जब जुबां और दिल सब हार कर अकेले में बैठते हैं,
    तब मैं दर्द से भरी चुनिंदा तस्वीरों का सहारा लेत […]

  • कुछ बेदर्द इंसानों ने अपनी अक्ल उतार कर रख दी,
    मासूम ज़िन्दगी की आईने में शक्ल उतार कर रख दी,

    दिन में लगे जो गहरे घावों की वस्ल उतार कर रख दी,
    पुनर्जन्म के पन्नों की खुदरी नक़्ल उतार कर रख दी।।

    राही अंजाना […]

  • शिकार करने चली थी बाज का,
    हुस्न के गुरूर मे ।।

    हँसी थामे ‘सच’ कहू …
    पर भी ना मिला कबुतर का ।।
    ~ सचिन सनसनवाल

  • बारिश की पहली बूंद सी
    सुकून दे जाती तू
    इस तपती धरती को
    जीने के और मौके दे जाती तू

    लाखों वजूहात थे नफ़रतें थी
    सब धूल गए
    अब बस तुझमे घुल जाने को दिल करता है
    बारिश के तेरे उस सहलाब मैं खो जाने को […]

  • Not afraid of being judged,
    Nor my image being smudged.
    No fear of the talks that give me tear,
    Nor from the one that makes my heart wear.
    But petrified of being misunderstood,
    Once it happens my heart is not […]

  • तोड़ सके तो कोशिश कर ले एक और बार,
    अब कसम से दिल को पत्थर कर लिया मैंने।।

    राही अंजाना

  • अँधेरे की वाट लगाने को जुगनुओं को आना पड़ा,
    समन्दर में नहाने को खुद उतर चाँद को आना पड़ा,

    आवाज़ लगाई दिल ओ ज़ान से मगर सुनी नहीं गई,
    तो गमों के बिस्तरों को फिर आसुओं से भिगाना पड़ा।।
    राही अंजाना

  • मरम्मत उसूलों की करनी अभी बाकी रह गई,
    कहीं सच के मुँह पर लगी झूठी चाबी रही गई,

    बना तो लिए बर्तन सोने चाँदी के भी कारीगर ने,
    के अमीरी में गरीबी की थाली यूँही खाली रह गई,

    आईने में देखनी सूरत खुद ही की सा […]

  • छोड़ कर पीछे सबको आज चाँद को घुमाने निकला हूँ,
    सच कहता हूँ दोस्त मेरे आज खुद को गुमाने निकला हूँ,

    सोया था न जाने कब से समन्दर की बाँहों में यूँ अकेला,
    पिघले हुए एहसास को आज फिर जमाने को निकला हूँ,

    राही अंजाना

  • ज़िन्दगी कोरा कागज़ थी हमारी
    तुमने कुछ रंग भर दिए
    आये हो तोह रुक जाओ
    इतनी जल्दी क्या जाने की

    पर रोक तोह हम सकते नही
    वरना रब बुरा मान जाएगा
    उसे भी तोह अच्छे लोगों की जरूरत है

    एक मैं ही महिरूह सा […]

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