दिल के ख्वाइश

दिल  के  ख्वाइशों  को  कौन सम्जा कौन  जाना , तुझ  बिन  था  तनहा  यह  दिल  मेरा , तुझ   बिन  था  सुना  यह  दिल  मेरा , तेरे  बिना  यह  दिल  तरसा , बिलकुल  तनहा ,   दील  के  ख्वाइशों  को  कौन  सम्जा  कौन  जाना

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6 Comments

  1. anupriya sharma - August 19, 2015, 9:32 am

    nice poem

  2. Antariksha Saha - August 18, 2015, 11:47 pm

    Thanks a lot to you,you are my inspiration

  3. Profile photo of Mohit Sharma

    Mohit Sharma - August 18, 2015, 10:38 pm

    nice khwaish!

  4. Profile photo of Panna

    Panna - August 18, 2015, 10:34 pm

    bahaut achi kavita

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