khwahishen

khwahishen

सेहम जाती है आँखे अधुरे ख्वाहिशों के बारिश में भीग कर,
एहसासों के बदलते भंवर में अक्सर डुब जाती हुं मैं ….

Previous Poem
Next Poem
Spread the love

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

2 Comments

  1. राही अंजाना - July 25, 2018, 9:08 pm

    Waah

  2. Bidya - July 27, 2018, 6:46 pm

    Thank u

Leave a Reply