Kar Guzar Jane Ka Jis Din Housala Ho Jayega

Kar Guzar Jane Ka Jis Din Housala Ho Jayega

Kar guzar jane ka jis din housala ho jayega
Is zamee’n se us falak tak rasta ho jayega

Tu baja le raag saare waqt jab tak sath hai
Zindagi ka saaz ik din besuraa ho jayega

Shaq kabhi rahne nahi deta salamat dosti
Rafta-rafta do dilo’n me faaslaa ho jayega

Pahli tankhwa’h dekh ro di maa ne kab socha tha ye
Itni jaldi phool sa baccha bada ho jayega

Ishq ki fitrat agar yun hi rahi sahab to fir
har diwana ik n ik din diljalaa ho jayega
….
कर गुज़र जाने का जिस दिन हौसला हो जायेगा
इस ज़मीं से उस फ़लक़ तक रास्ता हो जायेगा

तू बजा ले राग सारे वक़्त जब तक साथ है
ज़िन्दगी का साज़ इक दिन बेसुरा हो जायेगा

शक कभी रहने नहीं देता सलामत दोस्ती
रफ़्ता-रफ़्ता दो दिलों में फासला हो जायेगा

पहली तनख्वाह देख रो दी माँ ने कब सोचा था ये
इतनी जल्दी फूल सा बच्चा बड़ा हो जायेगा

इश्क की फितरत अगर यूँ ही रही ‘साहब’ फिर
हर दिवाना इक न इक दिन दिलजला हो जायेगा
….
साहब इन्दौरी


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 
यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|
 

Leave a Reply