जीवन

सागर लहरें आग पानी
जीवन की बस यही कहानी,
ये जो है झीनी चादर जिंदगानी
हमने- तुमने मिल बुनी है,
रेशे-रेशे में घुली है
तेरे-मेरे जज़्बातों की जवानी।

सागर लहरें आग पानी
जीवन की बस यही कहानी,
चांदनी रातों के परों पर
कितने अरमां की निशानी,
ले उड़ी उन फलों की
मीठी-मीठी सी कहानी।

सागर लहरें आग पानी
जीवन की बस यही कहानी,
चादर के हम छोरों को पकड़े
वक्त के मोड़ों में जकड़े,
सिलवटों से कितने सपने
ढों रहे हम अपने-अपने।

सागर लहरें आग पानी
जीवन की बस यही कहानी,
ये जो है झीनी चादर जिंदगानी
संजोए है युगों-युगों की कहानी,
छोरों को थामें है जिंदगानी
छुट गई तो खत्म कहानी।।

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2 Comments

  1. DV - March 9, 2018, 11:44 am

    beautiful poetry… keep writing

  2. Ritu Soni - March 10, 2018, 11:05 am

    thanks a lot

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