हँसो

हँसो, के मैं जहाँ जा रहा, वहां तुम्हारी सोच भी नहीं जाती |
हँसो, के मेरी आँखें जो सपने संजोए हैं, तुम्हारी देख भी नहीं पाती |
हँसो, तुम हँसो |
हँसो, के तुम्हारे यार कई हैं मगर अकेला खड़ा हू मैं |
हँसो, के तुम बहे जा रहे लहरों में मग़र उनसे लड़ा हूं मैं |
हँसो, तुम हँसो |
हँसो, के तुम्हें कोई गम नहीं और कितना रोता रहा हूं मैं |
हँसो, के तुम कभी उठे ही नहीं और गिर गिर कर खड़ा होता रहा हूं मैं |
हँसो, तुम हँसो |
हँसो, के तुम ज़िन्दगी काटने मे लगे हो और मैं बनाने मे |
हँसो, के तुम गुमनाम ही रहोगे और सब जानेंगे मुझे इस ज़माने में |
हँसो, तुम हँसो |

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3 Comments

  1. Anjali Gupta - January 7, 2019, 4:19 pm

    nice

  2. राही अंजाना - January 8, 2019, 7:44 pm

    वह

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