ख़ता दर ख़ता

ख़ता दर ख़ता

सोच कर यह ,

ख़ता दर ख़ता किए जा रहे हम ,

प्यार में तो वोह मिलने से गए ,

सजा देने ही शायद जाएँ लौट कर

                                                          …… यूई

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तू सबके दुःख हर जाता है

2 Comments

  1. Mohit Sharma - February 4, 2016, 10:31 am

    प्यार में तो वोह मिलने से गए ,
    सजा देने ही शायद आ जाएँ लौट कर…..bahut khoob

  2. Panna - February 4, 2016, 12:09 pm

    laazbaab!

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