मुक्तक 12

खत को मेरे संभाल के रखा जो होता मीर,
हर हर्फ़ मेरे प्यार की दास्ताँ कहते .
करे अब किस जगह रोशन गुलिश्ता ए जिगर को यार ,
यहाँ तो आशियाँ ही लुट गया है मीर तूफां में .

…atr

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Hi everyone. This is Abhishek from Varanasi.

3 Comments

  1. Priya rajput - July 5, 2015, 12:21 am

    I became ur fan Mr. Abhi…keep it up

  2. Panna - November 20, 2015, 7:43 pm

    Nice muktak…kahan busy ho aajkal?

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