फ़साना

न जाने किस-किस का हसीन आशियाना हूँ मैं,
लोग कहते हैं के खुले ज़माने का फ़साना हूँ मैं,

जो उखाड़ने की जद्दोजहद में हैं जड़ों को मेरी,
उनसे खुले दिल से कहता हूँ के कोई नामा हूँ मैं।।

राही अंजाना
नामा – इतिहास
फ़साना – किस्सा

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