असर

अब तो हमसे कोई और सफर नहीं होता,
क्यों भला उनसे अब भी सबर नहीं होता,

सब पर होता है बराबर से के जानता हूँ मैं,
एक बस उन्हीं पे मेरा कोई असर नहीं होता,

याद रह जाता गर प्यार में कोई सिफ़त होता,
खत्म हो जाता इस तरह के वो अगर नहीं होता,

रह के आया हूँ मैं उनकी हर गली सुन लो,
मान लो ये ‘राही’ वरन यूँ ही बेघर नहीं होता।।

सिफ़त – गुण
राही अंजाना

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

6 Comments

  1. Antariksha Saha - April 25, 2019, 11:52 pm

    Good one

  2. Poonam singh - April 27, 2019, 12:56 pm

    Wahhh

  3. Chandani yadav - April 28, 2019, 10:37 pm

    Wahhh

Leave a Reply