शब्द

हर शब्द हर वक्त तुझे झूठा ही लगेगा यहाँ,
जो तूने प्रेम का ढाई अक्षर गर पढ़ा ही नहीं,

जो कहता हूँ सच है ऐ मेरे दिल सुन तो ज़रा,
ख्वाब दिलों के बाहिर तूने कभी गढ़ा ही नहीं।।

राही अंजाना

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4 Comments

  1. देवेश साखरे 'देव' - March 23, 2019, 5:58 pm

    वाह

  2. Poonam singh - March 23, 2019, 6:30 pm

    Nice poem

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