अलकें

उसकी आँखों में मेरी आँखें उतर कर भूल गईं,
दिल ओ जिगर के पैमाने पे असर कर भूल गईं,

गहरा समन्दर था ये गुमान टूट कर बिखर गया,
उस रोज़ उसकी अलकों से सफर कर भूल गईं।।

राही अंजाना

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2 Comments

  1. Mithilesh Rai - March 17, 2019, 10:11 pm

    बहुत खूब

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