आसमानी

ये कहानी यूँहीं अल्फ़ाज़ों में बयाँ होगी नहीं,
बस दो चार किताबी पन्नों में जमा होगी नहीं,

एहसास ज़मी पर आसमानी करने वाले सुनो,
मोहब्बत ज़ंजीरों में जकड़ कर जवाँ होगी नहीं,

रास्ते राहों में खुद ब खुद तुम्हें तय करने होंगें,
हर बात ‘राही’ जज़्बातों में तो रमा होगी नहीं।।

राही अंजाना

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2 Comments

  1. देवेश साखरे 'देव' - March 4, 2019, 11:39 am

    बहुत खूब

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