राणा प्रताप का रक्त और हम कुंभा की कुर्बानी है

राणा प्रताप का रक्त और हम कुंभा की कुर्बानी है
हम है गीता की कृष्ण ध्वनि निर्मल गंगाजल पानी है
उबल रहा है बीर शिवा का शोणित निज भुजदंण्डो मे
हम हाड़ी की बलिदान कथा ,झाँसी की अमर कहानी है
हम वेद ऋचाओं का गायन , हम ही पुराण की वानी है
हम है धर्म ध्वजा धरती के , हम ही घाटी कल्यानी है
संपूर्ण विश्व कल्याण हेतु , हम ही अपार जल सिंधु है
है गर्व हमे हम हिंदू है , है गर्व हमे हम हिंदू है

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

1 Comment

  1. ज्योति कुमार - September 6, 2018, 1:28 am

    Nice sir

Leave a Reply