वो क्या जिए ज़िन्दगी जो रिवाज से जिए

वो क्या जिए ज़िन्दगी जो रिवाज से जिए,
जो हम जिए, बेफ़िक्र-ओ-ख़ुशमिज़ाज से जिए.

अब तक न हो पाया तो कोई अफ़सोस नहीं,
जिसे जीना हो खुल के, वो बस आज से जिए.

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3 Comments

  1. Anjali Gupta - January 7, 2019, 4:19 pm

    nice

  2. देवेश साखरे 'देव' - January 7, 2019, 4:45 pm

    बहुत खूब

  3. Antariksha Saha - January 10, 2019, 12:37 pm

    Very good

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