जब भी तेरी यादें पलक खोलती हैं

जब भी तेरी यादें पलक खोलती हैं!
कश्तियाँ ख्वाब की साँसों में डोलती हैं!
लफ्ज़ तोड़ देते हैं खामोशी अपनी,
#मंजिलें भी तेरा ही नाम बोलती हैं!

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Lives in Varanasi, India

3 Comments

  1. Panna - February 3, 2016, 2:05 pm

    umda!

  2. Anjali Gupta - February 3, 2016, 7:56 pm

    nice

  3. UE Vijay Sharma - February 16, 2016, 3:36 pm

    लफ्ज़ तोड़ देते हैं खामोशी अपनी ……. har lafaz apnee khamoshee cheekh cheekh kar byaan kar rha hai….bohut ache Mithilesh bhai

Leave a Reply