आज इम्तेहां है

आज इम्तेहां है

आज जज्बे का इम्तेहा होगा
कल कदमों में ये जहाँ होगा |
आज काश्मीर जीत लेना है
कल कब्जे में पाकिस्तां होगा ||
न धौंस दे मुझे ऐ दहशतगर्दी
कल न तेरा नमो निशां होगा |
जब भी इतिहास कोई देखेगा
पाक नापाक था बयां होगा ||
मेरे दीवार से टकरा ले मगर
कल तू इसमें कही दबा होगा |
किया पैदा तुझे जिसने बेअदब
उसके कदमों में तू पडा होगा ||
लहू से खेलने का शौक तूझे
कल लहू में तू नहा रहा होगा |
हमे मिटाने का सपना ना देख
कल दुनियां से तू फना होगा ||
जय हिन्द
उपाध्याय

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

2 Comments

  1. Udit jindal - August 6, 2016, 2:45 am

    umada lines

  2. Puneet Mittal - August 6, 2016, 2:57 am

    behtareen ji

Leave a Reply