मुक्तक

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मित्रता बड़ा अनमोल रतन
मैं कर्ण और तु दूर्योधन |
मैं बंधा हुआ एक अनुशासन
तु परम् स्वतंत्र दु:शासन ||
उपाध्याय…

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2 Comments

  1. Avantika Singh - July 8, 2016, 10:24 pm

    nice manoj ji

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