ख्वाहिशें

कुछ ख्वाहिशें दिल में रहती है
और कुछ दिल से निकल जाती है
तेरी हर एक तस्वीर नयी याद बनाये
और पुरानी यादें बदल जाती है

थक गया हूँ मैं यह कह- कह कर
आने दे मुझे तेरी पनाहों में
मेरी गुज़ारिशो से सुबह शुरू
तेरी ‘ना’ पर शाम ढल जाती है

तकलीफ़ों से निजात दिला दे तू
बेवहज ख्वाबों में मत सताया कर
दिल-ओ-दिमाग को ठंडक मिले
नज़रों में जो तेरी शक्ल जाती है

ना सुनी पायी तू मेरा ये अनकहा
और ना अब सुनना चाहती है
पर तू जिस पल सामने आ जाये
दीवाने के दिमाग से अक्ल जाती है

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

5 Comments

  1. Deepika Singh - March 10, 2017, 10:28 pm

    nice

  2. JYOTI BHARTI - March 10, 2017, 11:39 pm

    Awesome

  3. Panna - March 11, 2017, 12:09 am

    ख्वाहिशों के बाजार सेे इक ख्वाब खरीदने को जी करता है
    आज फिर से इन नयी जिंदगी जीने को जी करता है

Leave a Reply