खामोश जब मैं हो जाऊंगा

खामोश जब मैं हो जाऊंगा।
न फिर तुमको नज़र आऊंगा।

अब तो कहते हो चले जाओ;
यादें मगर ऐसी मैं दे जाऊंगा।

बदल जाएगा वक्त और हालात;
हर जगह नज़र पर मैं आऊंगा।

कैसे कह दोगे नहीं रिशता बाकि;
दिल से जब न निकल कभी पाऊंगा।।।
कामनी गुप्ता ***
जम्मू !

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2 Comments

  1. Ajay Nawal - August 26, 2016, 11:58 pm

    very nice poem

  2. kamni - August 27, 2016, 11:55 am

    Thanks ji

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