जरूरी नहीं

जरूरी नहीं , हम गले ही लगाएँ ।
जरूरी नहीं ,आप मिलने ही आएँ।
अमर प्रेम का ,ऐसा बंधन हमारा,
करें याद हम , हम तुम्हें याद आएँ।
******जानकी प्रसाद विवश**********

प्यारे मित्रो ,
पावन प्रेम से ओतप्रोत,
मधुर सवेरे की रसीली
पावन मंगलमय शुभकामनाएँ ,
सपरिवारसहर्ष स्वीकार करें।

आपका अपना मित्र
जानकी प्रसाद विवश

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1 Comment

  1. राही अंजाना - July 31, 2018, 11:25 pm

    Waah

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