नादान

हर एक तनहा लम्हे में एक अर्थ ढूँढा करती थी|
हर अँधेरी रुसवाई में गहरा अक्श ढूँढा करती थी |
मैं मेरी परछाई में एक शख्स ढूँढा करती थी|
मेरी मुझसे हुई जुदाई में कुछ वक़्त ढूँढा करती थी |
लोग कहते थे की नादानी का असर है,
मैं उस नादानी में भी कदर ढूँढा करती थी|

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3 Comments

  1. mansi - May 6, 2018, 12:07 pm

    nice thought

  2. bhoomipatelvineeta - May 6, 2018, 1:13 pm

    Benedict of your comment ma’am.

  3. राही अंजाना - July 31, 2018, 10:26 pm

    Wah

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