सावन का मुग्ध फुहार तू है

सावन का मुग्ध फुहार तू है ।

बूंदो की रमणीक धार तू है ।।

कोमल वाणी मे खिली,

आह! लचक सुरीली ।

खनकती बोली मे ढली,

ओह!आवाज सजीली

सावन झड़ी मस्त बहार तू है ।

सावन का मुग्ध फुहार तू है ।।

हवा की मादकता मधुर,

सरसराहट मे निखरी अजब,

बदन मे ऊमंग की सजी,

कशमकशाहट अजब।।

सावन की बेला साकार तू है ।

सावन का मुग्ध फुहार तू है ।।

पानी मे नहाया यौवन,

सांसो मे रफ्तार बढाये।

दृश्य सावन मे लाजवाब,

मन मे चाहते प्यार जगाये ।

सावनी बारिशकी रसधार तू है ।

सावन का मुग्ध फुहार तू है ।।

 

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

1 Comment

  1. राही अंजाना - July 31, 2018, 11:12 pm

    Waah

Leave a Reply