कतरा बन गिरो

कतरा बन गिरो,
पत्ते पर ओंस की भांति।

कतरा बन गिरो,
शीतल बारिश की भांति।

कतरा बन गिरो,
सीप में मोती की भांति।

कतरा बन गिरो,
पिघलते मोम सी ज्योति की भांति।

कतरा बन गिरो,
मातृभूमि पर लहू की भांति।

कतरा बन ऐसे न गिरो,
किसी आंखों से आंसू की भांति।

देवेश साखरे ‘देव’

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

2 Comments

  1. ashmita - January 22, 2019, 3:42 pm

    nice

Leave a Reply