मेरी कविता

मेरी कविता लफ़्जों को नहीं
अहसासों को जोड़ती है
तोड़ती है अकर्मण्य बेड़ियों को
लोगों को जोड़ती है

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4 Comments

  1. सीमा राठी - March 27, 2018, 4:31 pm

    bahut badia

  2. DV - March 27, 2018, 5:32 pm

    purposeful write.. like it

  3. Mithilesh Rai - March 30, 2018, 1:16 pm

    Very nice

  4. राही अंजाना - July 31, 2018, 10:44 pm

    Wah

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