खुश

ना किसी के इनतेज़ार मे
ना किसी के इंतज़ार की पुकार में
ना समुद्र के किनार पे
ना जी में , ना हार में
ना मंज़िल की आड़ में
ना प्यार में , ना उसके इकरार में
ना किसी के इनतेज़ार मे
ना किसी के इंतज़ार की पुकार में
ना समुद्र के किनार पे
ना जी में , ना हार में
ना मंज़िल की आड़ में
ना प्यार में , ना उसके इकरार में
खुश हो जाती हूँ केवल , कुछ “शब्दों” की तार में ! हो जाती हूँ केवल , कुछ “शब्दों” की तार में !

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

1 Comment

  1. Mohammad - February 13, 2017, 8:30 pm

    Kdak

Leave a Reply