गिरना

आसमान से धरती पर उस पानी का गिरना
आशाएँ , उम्मीदें जगाकर उस टूटते तारे का गिरना
लहराकर उचाई से उस झरने का गिरना
न चाहते हुए भी किसी का प्यार में गिरना
या फिर सालों पड़ी धुल का उस किताब से गिरना
उठना तो हर कोई सरहाता हैं
मेने सराहा हैं गिरना !!

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2 Comments

  1. Mr.Gupta - February 6, 2017, 11:32 am

    Fabulous

  2. देव कुमार - February 6, 2017, 5:34 pm

    Asm Poem

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