सत्ता के दलाल

धर्म  बेच देते हैं,

इमान बेच देते हैं,  

वतन की इज्जत,

और सामान बेच देते हैं,

चंद वोटों की खातिर,

सत्ता  के  दलाल,

हिंदू और मुसलमान बेच देते हैं,

बड़े  बेगैरत  होते हैं,

ये  सब  जानते  हैं,

चंद पैसों की खातिर,

गीता और कुरान बेच देते हैं।

बी के जिज्ञासु

 

 

 

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

1 Comment

  1. देव कुमार - June 9, 2016, 2:20 pm

    nice

Leave a Reply