दोहा

फूटी मटकी रख दयी, माटी लेप लगाय
पानी पल पल रिस रहा, मन भी धोखा खाय।

अशोक बाबू माहौर
10 /12 /2018

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3 Comments

  1. ashmita - December 10, 2018, 7:07 pm

    Nice

  2. राही अंजाना - December 11, 2018, 7:37 am

    waah

  3. Sridhar - December 14, 2018, 10:57 am

    Wah

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