मुक्तक

है परिभाषित सतत संघर्ष और संग्राम अभिनंदन।
हैं हम सारे अयोध्या के निवासी, राम अभिनंदन।
वो जो हर भौंकते से श्वान का मुंह वाण से भर दे।
कि इस कलयुग में उस एकलव्य है नाम अभिनंदन।

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4 Comments

  1. ashmita - April 21, 2019, 8:27 pm

    Nice

  2. Chandani yadav - April 21, 2019, 9:29 pm

    Wahhh

  3. Poonam singh - April 22, 2019, 1:38 pm

    Nice

  4. राही अंजाना - April 24, 2019, 11:17 pm

    वह

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