मुक्तक

मात्र श्रृंगार की ना रहे पराकाष्ठा
इसमें अंगार भी चरम होना चाहिए।
मात्र प्रेम और आसक्ति ना बने कविता
पंक्तियों में वंदे मातरम होना चाहिए।

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

5 Comments

  1. Anjali Gupta - April 10, 2019, 1:13 am

    agree!!

  2. देवेश साखरे 'देव' - April 10, 2019, 1:25 am

    बेशक

  3. Antariksha Saha - April 11, 2019, 12:16 am

    Bahut khub

  4. Poonam singh - April 11, 2019, 12:35 pm

    Yes

  5. Narendra Singh - April 14, 2019, 12:07 pm

    Thanks all

Leave a Reply