मुक्तक

होते ही सुबह तेरी तस्वीर से मिलता हूँ।
अपनी तमन्नाओं की ज़ागीर से मिलता हूँ।
नज़रों को घेर लेता है यादों का समन्दर-
चाहत की लिपटी हुई जंजीर से मिलता हूँ।

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

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Lives in Varanasi, India

5 Comments

  1. राही अंजाना - February 1, 2019, 11:51 am

    वाह

  2. देवेश साखरे 'देव' - February 1, 2019, 12:39 pm

    बहुत खूब

  3. ज्योति कुमार - February 2, 2019, 9:08 pm

    बहुत खुब

  4. Antariksha Saha - February 3, 2019, 6:37 pm

    Lajawab pantian

  5. ashmita - February 5, 2019, 11:27 pm

    Nice one as always

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