मुक्तक

आज फ़िर हाथों में जाम लिए बैठा हूँ।
तेरे दर्द का पैगाम लिए बैठा हूँ।
वस्ल की निगाहों में ठहरी हैं यादें-
आज फ़िर फुरक़त की शाम लिए बैठा हूँ।

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Lives in Varanasi, India

4 Comments

  1. देवेश साखरे 'देव' - January 28, 2019, 10:59 am

    बहुत खूब

  2. Antariksha Saha - February 1, 2019, 9:14 am

    Bahut umda

  3. राही अंजाना - February 3, 2019, 11:35 am

    Bdhiya

Leave a Reply