मुक्तक

मैं जब कभी तेरी तस्वीर देख लेता हूँ।
मैं अपने ख़्यालों की तक़दीर देख लेता हूँ।
ख़्वाबों के समन्दर में उठती है चिंगारी-
मैं तेरी अदाओं का तीर देख लेता हूँ।

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Lives in Varanasi, India

4 Comments

  1. देवेश साखरे 'देव' - January 21, 2019, 6:47 pm

    बहुत खूब

  2. ashmita - January 22, 2019, 3:42 pm

    nice

Leave a Reply