साप्ताहिक कविता प्रतियोगिता

मकर संक्रांति

मकर संक्रांति में जैसे ही ढल निकले, सूरज चाचू उत्तरायण में चल निकले, सोचा नहीं एक पल भी फिर देखो, टिकाई नज़र आसमाँ पर हम नकले, चढ़ा ली खुशबू रेवड़ी मूंगफली की ऐसे, के सुबह के भूले सारे मानो कल निकले, भर दिया जहन की ज़मी को ज़िद में अपनी, के ख्वाबों में टकराये जो हमसे वो जल निकले।। राही अंजाना »

जैसे जैसे मकर संक्रांति के दिन करीब आते हैं

जैसे जैसे मकर संक्रांति के दिन करीब आते हैं उत्सव का माहौल हवा में भर जाता है इतने ध्यान से तैयार किया गया कागज धागे के साथ पतंग बन उड़ जाता है ये कागज की पतंगें बहुत आनंद देती हैं नीले पैमाने पर, एकमात्र खिलौना ये सबको मंत्रमुग्ध कर देती हैं| हज़ारो पतंगे आसमान को भर देती हैं कीमती हीरो की तरह कई आकारो में सभी आँखें को आकाश की ओर मोड़ देती हैं युद्ध की शुरुआत पतंगों के टकराने से होती है पतंग काटने ... »

मकर संक्रांति

यूं तो भारतवर्ष, कई पर्वों त्योहारों का देश है। भिन्न बोली-भाषाएं, खान-पान, भिन्न परिवेश है। आओ मैं भारत दर्शन कराता हूं। महत्त्व मकर संक्रांति की बताता हूं। सूर्य का मकर राशि में गमन, कहलाता है उत्तरायण। मनाते हम सभी इस दिन, मकर संक्रांति का पर्व पावन। दक्षिणायन से उत्तरायण में सूर्य का प्रवेश है। यूं तो भारतवर्ष, कई पर्वों त्योहारों का देश है।। गुजरात, उत्तराखंड में उत्तरायण कहते। इस दिन पतंग प्... »

आओ मनाए मकर सक्रांति

आओ मनाए मकर सक्रांति, जीवन में लाए संस्कारों की क्रांति। सूरज देवता आए मकर राशि में, समय बड़ा बलवान जाने ना पाए बर्बादी में, स्नान ध्यान करें हम दान पुण्य, लोभ मोह क्रोध को कर दे हम खत्म, आओ मनाए मकर सक्रांति, जीवन में लाए संस्कारों की क्रांति। डाले गायों को चारा, आपस में बढ़ाएं भाईचारा, खेलें हम गिल्ली डंडा, मिटा दे आपस का लड़ना झगड़ना, आओ मनाए मकर सक्रांति, जीवन में लाएं संस्कारों की क्रांति। खा... »

“दहेजप्रथा मुक्त समाज”

बेटी है यह कोई सामान नहीं, यह अनमोल खजाना है, जिसका कोई दाम नहीं, बड़े लाड़ प्यार से पाला था जिसको, हर बुरी नजर से बचा कर संभाला था जिसको, आज उस जिगर के टुकड़े को खुद से जुदा करते हैं, पहले बेटी का सौदा करते हैं,फिर बेटी को विदा करते हैं, बचपन से उसकी हर एक जिद को पूरा किया, सारी खुशियाँ अरमानों को उसके तवज्जों दिया, अब उसे करके पराया घर से अलविदा करते हैं, पहले बेटी का सौदा करते हैं,फिर बेटी को विद... »

असमन्जस

असमंजस इसमें बिल्कुल नहीं के बच्चा हूँ मैं, बात ये है के ज़हन से अभी भी कच्चा हूँ मैं, आ जाऊँ बाहर या माँ की कोख में रह जाऊँ, सोच लूँ ज़रा एक बार के कितना सच्चा हूँ मैं, बड़ा मुश्किल है यहाँ पैर जमाना जानता हूँ मैं. मगर चाहता हूँ जान लूँ के कहाँ पर अच्छा हूँ मैं।। राही अंजाना »

मन में है असमंजस

मन में है असमंजस, नहीं आता कुछ समझ, जिस काम को करने पर मिले खुशी,ओंरो को मिले गम ,उस काम को करूं या ना करूं रहता यही असमंजस। मन में है असमंजस, घर पर हो रही अनबन, मेहमान आए उसी समय घर पर, क्या करें क्या ना करें रहता यही असमंजस। मन में ही असमंजस, उन्होंने बुलाया मिलने आ जाना, घरवालों ने कहा वहां पर मत जाना, क्या करूं क्या ना करूं रहता है यही असमंजस। मन में है असमंजस, बस बीते गए साल का मातम या नए साल... »

असमंजस में पड़ा इंसान

किस असमंजस में पड़ा इंसान। किस दोराहे पे खड़ा इंसान ।। दौलत के रिश्ते हैं, रिश्तों की यही अहमियत है । वक्त के साथ अपने, जज़्बात बदलने की सहुलियत है । जरूरत खत्म, रिश्ते खत्म, कड़वी, पर यही असलियत है । दौलत बड़ी या रिश्ते, किस बंधन में जकड़ा इंसान। किस असमंजस में पड़ा इंसान। किस दोराहे पे खड़ा इंसान ।। डूबते को बचाना छोड़ कर, ‘वीडियो’ बनाने में हम मशगूल। तड़पते का ‘फोटो’ खीं... »

उम्मीदों का नववर्ष

उम्मीदों की नई सुबह नववर्ष की। सुख – समृद्धि और उत्कर्ष की ।। आगे बढ़ते हैं, कड़वे पल भुला कर। छोड़ वो यादें, जो चली गई रुला कर। मधुर यादों के साथ, आओ नववर्ष का, स्वागत करें, उम्मीद का दीप जलाकर। बात करें मात्र खुशियां और हर्ष की। उम्मीदों की नई सुबह नववर्ष की । सुख – समृद्धि और उत्कर्ष की ।। आओ नववर्ष में होते हैं संकल्पित। जल की हर बूंद करते हैं संरक्षित। स्वच्छ वातावरण बनाने का प्रय... »

नया साल और मेरा प्यार

नया साल और मेरा प्यार….. अक्सर तेरे ख़्यालों में शाम हो जाया करती थी, अब एक साल और बीत चला तेरे इंतज़ार में, काश कि इस नए साल में मेरा प्यार मिल जाए…..!! अक्सर तेरा मेरे ख़्वाबों में आना कितना हसीन था, काश कि मेरा हर ख़्वाब हक़ीक़त बन जाए, काश कि इस नए साल में मेरा प्यार मिल जाए…!! वों पलक झपकते तेरा दीदार होना, वों तेरा सजना सँवरना, काश कि मेरी कल्पना से तू बाहर आ जाए, काश कि इस... »

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