साप्ताहिक कविता प्रतियोगिता

Marta kishan

मरता किसान जमीं को खोदकर अपना आसमान ढूंढते है पसीने की हर एक बूँद से अनाज उगाते है सबके मोहताज होने के बाद भी यह किसान हम सब की भूख मिटा जाते है सूखापन जमीं के साथ-साथ इनके जीवन में भी आ जाता मेघ के इंतजार में यह जवान कभी बुढ़ा भी हो जाता अपना स्वार्थ कभी न देखकर यह हमारी भूख मिटाकर खुद भूखा ही मर जाता पानी की याद में यह अपनी नैना मूंदते है जमीं को खोदकर अपना आसमान ढूंढते है धरती का सीना चीर यह जी... »

माँ की ममता

ममता के मन्दिर की जो मूरत है,दिखने मे बड़ी भोली सूरत है उस माँ को प्रणाम, माँ के चरणों मे प्रणाम। सूना-सूना लगता हे उसके बिना घर-आँगन, खुद से भी ज्यादा करती हे अपनों का लालन-पालन । जब भी माथे पे हाथ फिरौते-फिरौते अपनी गोदी में सुलाती, मीठी-मीठी नींद मे सुलाने नींदया रानी आ जाती। जब भी बेखबर भूख लगती अपने हाथ का बना खाना अपने लाड़ले को अपने हाथों से खिलाती, स्वाद उसमे ममतामयी आता सरजीवन बूँटी लगती उस... »

ममता

ये पेशानी पे जो लकीरें सी खिंची हुईं है, आँखों के तले बेनूर रातें सी बिछीं हुईं हैं, ये जो कांपते हाथों में काँच की चूड़ियाँ हैं, ऐश-ओ-आराम से जो ताउम्र की दूरियाँ हैं, ये जो मुस्कुराते होंठ हैं, दर्द को दबाए हुए, सीने में तमन्नाओं की तुर्बतें छुपाए हुए, ये जो साड़ियों के कोने कोने हैं फटे हुए, सालों साल से बस तीन रंगों में बँटे हुए, ये जो हाथों में गर्म दूध का इक गिलास है, बूढ़ी आँखों की लौ में भ... »

लक्ष्मण और मेघनाद का युद्ध

लक्ष्मण और मेघनाद का युद्ध आ गया अंततः वह भी क्षण आरंभ हुआ समर भीषण। दो वीर अडिग, अटल वीरत्व था साक्ष्य धरा का तत्व तत्व। एक ओर अहीश स्वयं लक्ष्मण है मही सकल टिकी जिनके फण। डटे सामने मेघनाद ले शुक्र से शिक्षा का प्रसाद। एक इंद्र जयी एक सूर्य वंश दोनों ही में क्षत्रीय अंश। वाणों में पावक सदृश घात नैत्रों में जैसे रक्तपात। तीरों से तीर प्रचण्ड लड़े सब देव असुर थे स्तब्ध खड़े। न कोई आधिक न कोई कमतर दोन... »

ममता की छांव

तेरे कांधे पे सर रख, रोना चाहता हूं मां। तेरी गोद में सर रख, सोना चाहता हूं मां। तू लोरी गाकर, थपकी देकर सुला दे मुझे, मैं सुखद सपनों में, खोना चाहता हूं मां। तेरी गोद में सर रख, सोना चाहता हूं मां।। इतना बड़ा, इतनी दूर न जाने कब हो गया, तेरा आंचल पकड़कर, चलना चाहता हूं मां। तेरी गोद में सर रख, सोना चाहता हूं मां।। जीने के लिए, खाना तो पड़ता ही है, तेरे हाथों से भरपेट, खाना चाहता हूं मां। तेरी गोद... »

“वो गाँव वाला यार”

आज दिल बेचैन है और बड़ा बेकरार है, बहुत याद आ रहा वो गाँव वाला यार है, बार-बार नजर आज उसका चेहरा आ रहा है, जैसे मुझे वो भी चीख-चीख के बुला रहा है, है गुजारा उसके साथ मैने सारा बचपन, साथ मौज-मस्तियां,शैतानियां करते थे हम, सबसे अलग,सबसे जुदा बहुत शानदार है, शांत,सरल,सहज मेरा गाँव वाला यार है, बचपन बिताया अपना सारा उसके साथ गाँव में, लड़ते-झगड़ते,खेलते थे बरगद के नीचे छांव में, गर कभी भी रूठूं उससे तो... »

मकर संक्रांति

मकर संक्रांति में जैसे ही ढल निकले, सूरज चाचू उत्तरायण में चल निकले, सोचा नहीं एक पल भी फिर देखो, टिकाई नज़र आसमाँ पर हम नकले, चढ़ा ली खुशबू रेवड़ी मूंगफली की ऐसे, के सुबह के भूले सारे मानो कल निकले, भर दिया जहन की ज़मी को ज़िद में अपनी, के ख्वाबों में टकराये जो हमसे वो जल निकले।। राही अंजाना »

जैसे जैसे मकर संक्रांति के दिन करीब आते हैं

जैसे जैसे मकर संक्रांति के दिन करीब आते हैं उत्सव का माहौल हवा में भर जाता है इतने ध्यान से तैयार किया गया कागज धागे के साथ पतंग बन उड़ जाता है ये कागज की पतंगें बहुत आनंद देती हैं नीले पैमाने पर, एकमात्र खिलौना ये सबको मंत्रमुग्ध कर देती हैं| हज़ारो पतंगे आसमान को भर देती हैं कीमती हीरो की तरह कई आकारो में सभी आँखें को आकाश की ओर मोड़ देती हैं युद्ध की शुरुआत पतंगों के टकराने से होती है पतंग काटने ... »

मकर संक्रांति

यूं तो भारतवर्ष, कई पर्वों त्योहारों का देश है। भिन्न बोली-भाषाएं, खान-पान, भिन्न परिवेश है। आओ मैं भारत दर्शन कराता हूं। महत्त्व मकर संक्रांति की बताता हूं। सूर्य का मकर राशि में गमन, कहलाता है उत्तरायण। मनाते हम सभी इस दिन, मकर संक्रांति का पर्व पावन। दक्षिणायन से उत्तरायण में सूर्य का प्रवेश है। यूं तो भारतवर्ष, कई पर्वों त्योहारों का देश है।। गुजरात, उत्तराखंड में उत्तरायण कहते। इस दिन पतंग प्... »

आओ मनाए मकर सक्रांति

आओ मनाए मकर सक्रांति, जीवन में लाए संस्कारों की क्रांति। सूरज देवता आए मकर राशि में, समय बड़ा बलवान जाने ना पाए बर्बादी में, स्नान ध्यान करें हम दान पुण्य, लोभ मोह क्रोध को कर दे हम खत्म, आओ मनाए मकर सक्रांति, जीवन में लाए संस्कारों की क्रांति। डाले गायों को चारा, आपस में बढ़ाएं भाईचारा, खेलें हम गिल्ली डंडा, मिटा दे आपस का लड़ना झगड़ना, आओ मनाए मकर सक्रांति, जीवन में लाएं संस्कारों की क्रांति। खा... »

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