Poetry on Picture Contest

मैं हु एक शराबी शराब जानता हू

मैं हु एक शराबी शराब जानता हू

मैं हु एक शराबी शराब जानता हू कुछ नहीं सिवा इसके नाम जानता हू उतर जाती है ये सीनै में सुकून देने कुछ नहीं में इसका ईमान जानता हू मैं हु एक शराबी शराब जानता हू कुछ नहीं सिवा इसके नाम जानता हू टूटे हुए दिलो को सुकून बड़ा देती है ये कुछ नहीं में बस इसका अरमान जानता हू मैं हु एक शराबी शराब जानता हू कुछ नहीं सिवा इसके नाम जानता हू न करो कोई इस मासूम को यूँ ही बदनाम कुछ नहीं बस में इसका हर नाम जानता हू म... »

कातिल नज़र

कातिल नज़र

न तीर चल सकेगा, न आज तलवार चल सकेगी आज कत्ल-ऐ-आम होगा, बस उनकी कातिल नज़रों से…………!! »

दिखाई पड़ता है

दिखाई पड़ता है

तेरी आंखें में जैसे कोई नशा दिखाई पड़ता है तेरे होंठ में जैसे कोई मदिरा दिखाई पड़ता है ये तेरा धीरे धीरे पलकों को उठा कर हँसना तेरे मुस्कुराहट में जैसे कोई कतल-ऐ-अंदाज़ दिखाई पड़ता है ये तेरे सुनहरे, रेशम जैसे बाल क्या कहू तेरे बालों की लटें जैसे कोई घटा दिखाई पड़ता है यूँ तेरा एकटक हमको देखना बिना नज़रें झुकाये तेरे आँखों में जैसे कोई अपना दिखाई पड़ता है तुझे पा तो लिया मगर यकीं नहीं आता दिल को तेरे प्य... »

कैसे रहते है हम

कैसे रहते है हम

पूछा जो उस ने हम से की अब कैसे रहते है हम, हमने भी हँस कर जवाब दे दिया की अब तनहा रहते है हम……………………!! »

तनहा-तनहा सा है, बिखरा-बिखरा सा

तनहा-तनहा सा है, बिखरा-बिखरा सा

  ये गुलाब थोड़ा तनहा-तनहा सा है ये गुलाब थोड़ा बिखरा-बिखरा सा है छूटा है ये शायद किसी के हाथों से ये गुलाब थोड़ा सहमा-सहमा सा है रहता है काँटों के साथ है कर, खुसी से ये गुलाब थोड़ा सेहता-सेहता सा है सुंदरता इसकी क्या कहे हम तुम से ये गुलाब थोड़ा जवा-जवा सा है अभी नहीं निकली है जान इसकी ये गुलाब थोड़ा हरा-हरा सा है कोई कमी नहीं दिखती है हमको इस मैं ये गुलाब थोड़ा भरा-भरा सा है मनमोहक सी अदा जान पड़ती... »

हमेशा मुस्कुराते रहो

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Betiya

Betiya

Aye duniya valo tumne bhi kya reet Banyi Q likh dii maa baap se betiyo k hisse mai judayi Q nhi hoti is jag mai ladko ki vedayi…. By RLv gahlot   »

तिरंगा

ना बिलखे भूख से ना कोई बच्चा नंगा रहे ना हो आतंक के साये ना कहीं कोई दंगा रहे मेरे भारत में चहुँ ओर बस प्रेम की गंगा बहे “आदि” का हो अन्त तब उसका कफ़न तिरंगा रहे जय हिन्द ! जय भारत ! ऋषभ जैन “आदि” »

“पतझड़”

मासूम निगाहें पलकों पर आश सजोयें अब भी राह ताकती होंगी, सबके खो जाने के गम में छुप – छुप  कर  दर्द  बाँटती  होंगी, वो यादें बड़ी सुनहरी है उनको मैं बार बार दोहराता हूँ, उनको हर वक्त याद कर कर ख्वाबों में गुम हो जाता हूँ, हर वक्त इसी का इन्तजार कि कोई तो उंगली थामेगा,कोई फिर नन्हें पांवो को  सही  राह दिखलायेगा, हर गलती पर पीछे मुड़ता की फिर कोई डाँट लगायेगा, फिर कोई बाहों में भर गालों को सहला... »

” बच्चे और सपने “

सपनों में बच्चे देखना सुखद हो सकता है ; लेकिन ; बच्चों में सपने देखना आपकी भूल है जैसे; सपने…… सिर्फ़ सपने बच्चे : साकार नहीं करते वैसे ही; बच्चों में सपने साकार करना फिजूल है. हाँ ! आप ऐसा करिए; बच्चों में सपने रोपिए शिक्षा और संस्कार कदापि न थोपिए . आपके सपने ————— चाहे जितने रंगीन हों आपकी विफलता की कहानी हैं बच्चों की उडान उनकी सफलता की निशानी हैं. आप ... »

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