Poetry on Picture Contest

वो हिन्द का सपूत है..

वो हिन्द का सपूत है..

लहू लुहान जिस्म रक्त आँख में चड़ा हुआ.. गिरा मगर झुका नहीं..पकड़ ध्वजा खड़ा हुआ.. वो सिंह सा दहाड़ता.. वो पर्वतें उखाड़ता.. जो बढ़ रहा है देख तू वो हिन्द का सपूत है.. वो दुश्मनों पे टूटता है देख काल की तरह.. ज्यों धरा पे फूटता घटा विशाल की तरह.. स्वन्त्रता के यज्ञ में वो आहुति चढ़ा हुआ.. जो जल रहा है देख तू वो हिन्द का सपूत है.. वो सोचता है कीमतों में चाहे उसकी जान हो.. मुकुटमणि स्वतंत्रता माँ भारती की श... »

बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ

बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ

जिम्मेंदारी को जब उसने महसूस किया तो, ऑटो रिक्शा भी चलाने लगती हैं वो ! पढ़ लिख के सक्षम होकर के वो अब, अंतरिक्ष में वायुयान उड़ाने लगती हैं वो !! कितने उदाहरण देखेंगे आप अब क्योकि, हर क्षेत्र में सकती आजमाने लगी हैं वो ! पति की शहादत पे अर्थी को कांधा दे, सुना हैं शमशान तक जाने लगी हैं वो !! समस्त बाधाओं को वो हरती क्यों हैं, कुछ बोलने से पहले वो डरती क्यों हैं ! प्रश्न ये ज्वलनशील है सबके सामने ये... »

बेटी की चाहत

अँधेरे कमरे से बाहर अब मैं निकलना चाहती हूँ, माँ की नज़रों में रहकर अब मैं बढ़ना चाहती हूँ, धुंधली न रह जाए ये जिन्दगी मेरी, यही वजह है के मैं अब पढ़ना चाहती हूँ, खड़ी हैं भेदभावों की दीवारें यहाँ अपनों के ही मध्य, मैं मिटा कर मतभेद सबसे जुड़ना चाहती हूँ, दबा रहे हैं जो आज मेरी देह की आवाज को, अब धड़कन ऐ रूह भी मैं उनको सुनाना चाहती हूँ॥ राही (अंजाना) »

एक ख्वाहिश मेरी भी

ख़्वाब देखती है आँखै मेरी भी उड़ना चाहती हु मै भी पढू , लिखू बनू अफसर मै भी आकाश मै उड़ता जहाज देखू मै जब भी साथ वो अपने मुझे ले जाता है पढ़ने , लिखने का जो तुम मुझको एक मौका दे दो है तो हक़ मेरा , पर तुम अपनी जायदाद समझकर देदो एक रोज अफसर बन तुमको भी जहाज मै बिठा आकाश की सैर कराऊँगी मै मुझे न सही मेरी, ख्वाहिश को अपना समझ लो बेटो को तो आजमा लिया सबने , अब मुझको भी अपनी अजमाइस का एक मौका दे दो ! »

बेटी हूँ हां बेटी हूँ

बचपन से ही सहती हूँ, मैं सहमी सहमी रहती हूँ, छुटपन में कन्या बन कर संग माँ के मैं रहती हूँ, पढ़ लिखकर मैं कन्धा बन परिवार सम्भाले रखती हूँ, फिर छोड़ घोंसला अगले पल मैं पति घर में जा बसती हूँ, पत्नी रूप में भी मैं हर बन्धन में बन्ध कर रहती हूँ, खुद के ही पेट से फिर माँ बनकर मैं (बेटी) जन्म अनोखा लेती हूँ, पढ़ जाऊ तो नाम सफल और जीवन सरल कर देती हूँ॥ बचपन से ही सहती हूँ, मैं सहमी सहमी रहती हूँ, मैं बेटी... »

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ

  माँ,मैं तेरे हर सपने को सच करके दिखाउंगी तेरे हर मुसीबत मे तेरे, मैं भी काम आउंगी रोशन कर दूंगी मैं तेरा नाम इस दुनिया मे मुझे भी आने दे माँ, इस दुनिया मे माँ,मैं तुझे कभी नहीं सताऊँगी तेरे होंठों पर हमेशा मुस्कराहट खिलाऊंगी कर दूंगी मैं भी कुछ ऐसा काम इस दुनिया मे मुझे भी आने दे माँ, इस दुनिया मे माँ,मैं तेरी ज़िन्दगी जीने की वजह बन जाऊंगी तेरे बुढ़ापे मे, मैं तेरी लाठी कहलाउंगी सब देखते रह ... »

बेटी की आवाज

माँ की कोख में ही दबा देते हो, मुझको रोने से पहले चुपा देते हो, आँख खुलने से पहले सुला देता हो, मुझको दुनियां की नज़र से छुपा देते हो, रख भी देती हूँ गर मैं कदम धरती पर, मुझको दिल में न तुम जगह देता हो, आगे बढ़ने की जब भी मै देखूं डगर, मेरे पैरों में बेडी लगा देते हो, पढ़ लिख कर खड़ी हो न जाऊं कहीं, मुझको पढ़ाने से जी तुम चुरा लेते हो, क्यों दोनों हाथों में मुझको उठाते नहीं, आँखों से अपनी मुझको बहा देत... »

मुझको बचाओ मुझको पढ़ाओ

कन्या बचाओ खुद कन्या कहती है- मुझको बचाओ तुम मुझको बचाओ, सपना नहीं अब हकीकत बनाओ, बेटा और बेटी का फर्क मिटाओ, बेटी बचाओ अब बेटी पढ़ाओ, बेटे के प्रति प्यार और बेटी को समझें भार, ऐसे लोगों की गलत सोंच भगाओ, मुझको बचाओ तुम मुझको बचाओ, रखने से पहले कदम ना मेरे निशाँ मिटाओ, आने दो मुझको तुम सीने से लगाओ, फैंको ना मुझको कचरे के देर में, मारो ना मुझको तुम ममता की कोख में, घर के अपने तुम लक्ष्मी बनाओ, मुझक... »

जय हिन्द

ये  अजूबा  किसने  कर दिया फक्त एक मुट्ठी मैं सारा हिन्द इकट्ठा कर दिया तीन ही रंगों मैं सारा हिन्द बया कर दिया केसरी है वीरो के , बलिदानो का प्रतीक जिन्होंने  स्वय को समर्पित कर अपने लहू से तिलक कर हिन्द के माथे को चन्दन-सा महका   दिया ! सफेद है उस सांति का प्रतीक जिसके लिये फिरती है दुनिया मारी -२ लेकिन हिन्द गोद को इससे शुशुभित कर दिया ! हरा रंग है उस खुशहाली का प्रतीक जब हिन्द की मिटटी को दुश्म... »

रंग नहीं महज़ ये तीनो……..

रंग नहीं महज़ ये तीनो……..

रंग नहीं महज़ ये तीनो हमारे हिंदुस्तान की शान है झंडा है ये हमारे देश का तिरंगा इसका नाम है सर से भी ऊँचा रखेंगे हम इसको जब तक जिस्म में जान है हर पल देते है सलामी दिल से के ये हमारी पहचान है दुश्मन क्या समझेगा इसकी ताकत अभी वो बहुत अनजान है पूछो जा कर उन लोगो से जिनकी ज़िन्दगी तिरंगे के बिना वीरान है मर मिटेंगे इसके खातिर हम के ये हमारा गुमान है अशोक चक्र से सुसज्जित है ये हर फौजी को इसका ध्यान है ... »

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